भारत-अमेरिका व्यापार समझौता एक ऐसा समझौता है जो पंजाब और देश के किसानों को बर्बाद कर देगा : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
– भारत-अमेरिका व्यापार समझौता तीन काले कृषि कानूनों से भी अधिक खतरनाक : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
– भारत के कृषि बाज़ार को अमेरिका के लिए खोलकर मोदी सरकार देश को विदेशी ताकतों के रहमो-करम पर छोड़ने का लाइसेंस दे रही है : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
– पता नहीं डोनाल्ड ट्रंप को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कौन-सी कमजोरी पता चल गई है कि अमेरिका उनसे जो चाहता है, करवा रहा है : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
– पंजाब के आरडीएफ, जीएसटी और एनएचएम फंड रोककर मोदी सरकार किसान आंदोलन का बदला ले रही है: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
– जब अमेरिकी सोयाबीन, मक्का, कपास और अन्य कृषि उत्पाद भारत में सस्ते बिकने लगेंगे तो हमारे किसान उनसे मुकाबला कैसे करेंगे ? : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
– क्या भारत को वॉशिंगटन के व्हाइट हाउस से चलाया जा रहा है, जो हमें रूस से तेल खरीदने की अनुमति दे रहा है ? : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
– पंजाब विधानसभा ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित किया
CHANDIGARH/MOHALI/SANGHOL-TIMES/JATINDER PAL SINGH/10th March,2026:
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मंगलवार को चेतावनी देते हुए कहा कि प्रस्तावित भारत‑अमेरिका व्यापार समझौता देश के कृषि क्षेत्र के लिए तीन विवादित कृषि कानूनों से भी अधिक खतरनाक साबित हो सकता है, जिनके कारण ऐतिहासिक किसान आंदोलन शुरू हुआ था। पंजाब विधानसभा में कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव पर चर्चा का समापन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारत का बाज़ार खोलना पंजाब सहित पूरे देश के किसानों के लिए गंभीर चुनौती बन जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि यह समझौता लागू हुआ तो भारतीय किसानों को अमेरिकी उत्पादों से प्रतिस्पर्धा करने के लिए अत्यधिक संघर्ष करना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समझौता भारत की कृषि संप्रभुता के लिए बड़ा खतरा है और इससे देश का कृषि क्षेत्र विदेशी शक्तियों के प्रभाव में आ सकता है। उन्होंने कहा कि इस समझौते के संभावित नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए पंजाब विधानसभा ने सर्वसम्मति से इसके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया है।
सदन को संबोधित करते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह समझौता केंद्र सरकार द्वारा पहले लाए गए तीन कृषि कानूनों से भी अधिक खतरनाक हो सकता है। उन्होंने कहा कि पहले ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में प्रवेश करके देश को आर्थिक रूप से लूटा था और अब ऐसा प्रतीत होता है कि एक तरह की “वेस्ट इंडिया कंपनी” भारत की कृषि व्यवस्था में प्रवेश करने की तैयारी कर रही है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस प्रस्तावित समझौते के बारे में संबंधित राज्यों से न तो सलाह की गई और न ही उन्हें इस बारे में कुछ बताया गया। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका समझौते को लेकर अब तक किसी भी राज्य सरकार से कोई परामर्श नहीं किया गया है और न ही किसी को इसकी जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि पता नहीं इस मामले में प्रधानमंत्री जी की क्या मजबूरी है। उन्होंने कहा कि इससे सभी को यह सोचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है कि क्या भारत के फैसले अब व्हाइट हाउस के हस्तक्षेप से लिए जा रहे हैं और क्या केंद्र सरकार का रिमोट विदेशी ताकतों के हाथों में है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि जिस तरह से बड़ी से बड़ी बात भी विदेशी नेताओं के साथ साझा की जा रही है, वह अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि जब भारत-पाकिस्तान युद्धविराम हुआ था, तो इसकी जानकारी सबसे पहले डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एक ट्वीट के माध्यम से साझा की गई थी, जबकि भारत को बाद में इस बारे में पता चला। यह स्थिति केंद्र सरकार के कामकाज पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है।
समझौते के कृषि प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डीडीजीएस और सोयाबीन तेल जैसे फीड विकल्पों का सस्ता आयात मक्का और सोयाबीन की कीमतों को काफी हद तक गिरा सकता है, जिससे पंजाब में फसल विविधीकरण के प्रयासों को बड़ा झटका लग सकता है। उन्होंने आगे कहा कि भले ही कपास के आयात को कोटा के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है, फिर भी यह कपास की कीमतों में गिरावट का कारण बन सकता है, जिससे पंजाब के मालवा क्षेत्र के कपास किसानों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ गैर-शुल्क (नॉन-टैरिफ) शर्तों में ढील देने से जीएमओ सामग्री के प्रवेश तथा नए कीटों, फसल रोगों और खतरनाक खरपतवारों के फैलने का खतरा बढ़ सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी स्थिति पंजाब के कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका में कृषि संरचना भारत की तुलना में काफी अलग है। अमेरिका की कृषि विशाल खेतों, उच्च सब्सिडी और पैमाने की अर्थव्यवस्था पर आधारित है, जो उत्पादकों को कम कीमतों पर भी निर्यात करने में सक्षम बनाती है। ऐसी स्थिति में पंजाब के किसानों के लिए अमेरिकी कृषि उत्पादों से मुकाबला करना बेहद कठिन हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि अमेरिका से पशुओं के चारे के लिए सोया फीड कथित तौर पर बड़ी मात्रा में आयात किया जाएगा। “पंजाब लगभग 1.25 लाख हेक्टेयर में मक्का की खेती करता है और इस समझौते से मक्का तथा सोयाबीन दोनों फसलों पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसी तरह अमेरिका से कपास का आयात पंजाब के किसानों को बहुत प्रभावित कर सकता है, जहां लगभग 2.5 लाख एकड़ में कपास की खेती होती है।”
खेतों के आकार और सब्सिडी में असमानता को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अमेरिका में औसत किसान के पास लगभग 500 एकड़ भूमि होती है और अमेरिकी किसानों को भारतीय किसानों की तुलना में लगभग 35 प्रतिशत अधिक सब्सिडी मिलती है। इसके विपरीत पंजाब के किसानों के पास आमतौर पर केवल दो से ढाई एकड़ जमीन होती है, जिससे उनके लिए अमेरिकी उत्पादों का मुकाबला करना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बौद्धिक संपदा (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी) से संबंधित प्रावधानों के कारण किसान अगले फसल सीजन के लिए बीज नहीं बचा सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, “किसानों को अगले फसल सीजन के लिए बीज बचाने की अनुमति नहीं होगी क्योंकि बीज पेटेंट सुरक्षा के दायरे में आ जाएंगे। किसान इसके कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ग्राहक बन जाएंगे और बीज डीलरों को नए लाइसेंस लेने की जरूरत पड़ेगी। इस समझौते से विदेशी कंपनियों को कृषि क्षेत्र में पैर पसारने का अवसर मिल जाएगा।”
प्रधानमंत्री के विदेशी दौरों पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने टिप्पणी की, “प्रधानमंत्री अक्सर ऐसे देशों का दौरा करते हैं जिनके नाम बहुत से लोगों ने कभी सुने भी नहीं होते। ये दौरे लगभग 10,000 की आबादी वाले छोटे देशों में आयोजित शो जैसे लगते हैं। ऐसे देशों में घूमने के बजाय उन्हें भारत के 1.25 अरब लोगों की आवाज़ सुनने पर ध्यान देना चाहिए।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने प्रधानमंत्री के वन्यजीव कार्यक्रम में आने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डिस्कवरी चैनल जैसे प्लेटफॉर्मों का इस्तेमाल अपने प्रचार के लिए किया जा रहा था। ऐतिहासिक घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा कि एक बार अमेरिका से आयात की गई गेहूं के साथ खतरनाक “कांग्रेस बूटी” भी आ गई थी, जो आज भारत में एक बड़ी समस्या बनी हुई है।
मुख्यमंत्री ने आगे चिंता जताई कि केंद्रीय बजट में कृषि के हिस्से में भारी कटौती की गई है। उन्होंने कहा, “कभी कृषि को केंद्रीय बजट का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा दिया जाता था, लेकिन अब इसे घटाकर लगभग 7 प्रतिशत कर दिया गया है।” इसके साथ ही भारतीय फलों और कृषि उत्पादों को विदेशों में सख्त परीक्षण से गुजरना पड़ता है, जबकि अमेरिका से आयात किए गए उत्पादों को अक्सर वहां स्वीकृत प्रयोगशालाओं के माध्यम से ही मंजूरी दे दी जाती है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने यह भी कहा कि जब विपक्ष संसद में मुद्दे उठाता है तो उनकी आवाज़ अक्सर दबा दी जाती है। उन्होंने टिप्पणी की कि भारत को “विश्व गुरु” बनाने के बजाय नरेंद्र मोदी की सरकार “विश्व चेला” बनने की दिशा में बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि केंद्र का पंजाब के प्रति नजरिया राज्य के साथ की जा रही अनदेखी को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “हालांकि बाढ़ के दौरान पंजाब को पर्याप्त फंड नहीं मिले, लेकिन अफगानिस्तान को वित्तीय सहायता प्रदान की गई। केंद्र ने पंजाब के ग्रामीण विकास फंड (आरडीएफ), जीएसटी और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से संबंधित फंड अभी तक जारी नहीं किए हैं।”
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि चंडीगढ़ और पंजाब विश्वविद्यालय पर कब्जा करने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्र सरकार में ज्यादातर फैसले केवल दो नेताओं—प्रधानमंत्री और गृह मंत्री—द्वारा ही लिए जाते हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि जब उन्होंने अनाज भंडारों की लिफ्टिंग और खाद की आपूर्ति के संबंध में केंद्रीय मंत्रियों से संपर्क किया तो उन्होंने जवाब दिया कि इसके लिए उच्च नेतृत्व से मंजूरी आवश्यक है। उन्होंने भारत की विदेश नीति को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि कई अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में भी प्रधानमंत्री को आमंत्रित नहीं किया गया, जो देश की स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
उन्होंने पहले किए गए विरोध के बावजूद रक्षा क्षेत्र में 51 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति देने के फैसले की भी आलोचना की। मुख्यमंत्री ने कहा, “सरकारी इमारतों और शहरों के नाम बदलने के बजाय केंद्र को लोगों के जीवन को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की आलोचना करना एक लोकतांत्रिक अधिकार है और सरकार के खिलाफ बोलने वाले किसी भी व्यक्ति को देशविरोधी नहीं कहा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो जैसी एजेंसियों का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है और लोकतंत्र की आवाज़ को दबाया जा रहा है।
पंजाब के कई राजनीतिक नेताओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह, सुनील जाखड़, मनप्रीत सिंह बादल, प्रताप सिंह बाजवा और रवनीत सिंह बिट्टू जैसे नेताओं ने पंजाब और पंजाबियों के साथ हो रहे अन्याय पर चुप्पी साध रखी है।
मुख्यमंत्री ने अंत में किसान यूनियनों, कृषि विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों से इस समझौते के खिलाफ एकजुट होने और अपनी आवाज़ बुलंद करने की अपील की। उन्होंने आगे कहा, “भारतीय कृषि के भविष्य की रक्षा करना समय की मांग है। नहीं तो केंद्र सरकार देश और उसके लोगों के अधिकारों को लूटकर उन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका के सामने गिरवी रख देगी। ऐसा गलत काम न तो स्वीकार्य है और न ही लाभदायक।”
पंजाब विधानसभा ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित किया।
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*Trade deal with United States is pact that will ruin farmers of Punjab & country: CM Bhagwant Singh Mann*
*India-US trade deal is even more dangerous than three black farm laws: CM Bhagwant Singh Mann*
*By opening India’s agricultural market for US, Modi Govt is issuing licence to place country at mercy of foreign powers: CM Bhagwant Singh Mann*
*What weakness of PM Modi has Donald Trump discovered that US can make him do anything? CM Bhagwant Singh Mann*
*By withholding Punjab’s RDF, GST and NHM funds, Modi Govt is taking revenge for farmers’ movement: CM Bhagwant Singh Mann*
*When American soyabean, maize, cotton and other agricultural products are sold cheaply in India, how will our farmers compete? CM Bhagwant Singh Mann*
*Is India being run from White House in Washington that it is granting us permission to buy oil from Russia? CM Bhagwant Singh Mann*
*Punjab Vidhan Sabha unanimously passes condemnation resolution against trade deal with US*
CHANDIGARH/MOHALI/SANGHOL-TIMES/JATINDER PAL SINGH/10th March,2026:
Punjab Chief Minister Bhagwant Singh Mann on Tuesday cautioned that the proposed India–US (United States) trade agreement could inflict damage on Indian agriculture far greater than the three black farm laws that had triggered a historic farmers’ movement. Speaking in the Punjab Vidhan Sabha while winding up a debate on a resolution moved by Agriculture Minister Gurmeet Singh Khudian, the Chief Minister warned that opening India’s agricultural markets to heavily subsidised American produce would leave farmers in Punjab and across the country struggling to compete.
Declaring the trade deal a threat to the country’s agricultural sovereignty, CM Bhagwant Singh Mann said the agreement could place India’s farming sector at the mercy of foreign powers, even as the Punjab Vidhan Sabha unanimously passed a condemnation resolution against the proposed deal.
Addressing the House, CM Bhagwant Singh Mann said, “The India–US agreement is even more dangerous than the three controversial farm laws brought by the Modi government and can severely harm India’s agriculture. Earlier the East India Company captured and plundered India, and now the ‘West India Company’ has started infiltrating the country. This agreement can destroy Indian agriculture, and the agriculture sector must be kept completely outside it.”
The Chief Minister further pointed out that states had neither been consulted nor informed about the proposed agreement. “No state government has been consulted or even informed about the India–US agreement so far. It is unclear what compulsion the Prime Minister has in this matter. One begins to wonder whether India’s decisions are now being influenced by the White House and whether the remote of the Union government is in foreign hands,” he stated.
CM Bhagwant Singh Mann added that the manner in which major developments are communicated has also raised serious questions. “When the India–Pakistan ceasefire took place, the information was first shared by Donald Trump through a tweet, and India came to know about it later. This situation reflects poorly on the functioning of the government,” he noted.
Expressing concern over the agricultural implications of the agreement, the Chief Minister said cheaper imports of feed substitutes such as DDGS and soybean oil could depress the prices of maize and soybean, thereby affecting Punjab’s ongoing crop diversification efforts. He added, “Even if cotton imports are regulated through quotas, they may still exert downward pressure on prices, adversely impacting cotton farmers in Punjab’s Malwa region.”
He also warned that easing certain non-tariff barriers could increase the risk of the entry of GMO material and the spread of new pests, plant diseases and invasive weeds. “Such developments may pose a serious threat to Punjab’s agricultural ecosystem,” the Chief Minister said.
CM Bhagwant Singh Mann further stated that the agricultural structure in the United States is vastly different from that in India. “Agriculture in the United States operates on large landholdings, higher subsidies and economies of scale, enabling producers to export at lower prices. In such a scenario, farmers in Punjab will find it extremely difficult to compete with American agricultural products.”
He pointed out that soya meal from the United States would reportedly be imported in huge quantities for cattle feed. “Punjab cultivates around 1.25 lakh hectares of maize, and both maize and soybean crops could be adversely affected by this pact. Similarly, cotton imports from the US may impact farmers in Punjab, where cotton is grown on about 2.5 lakh acres,” the Chief Minister said.
Highlighting the disparity in farm sizes and subsidies, CM Bhagwant Singh Mann said, “In the US, the average farmer owns about 500 acres of land, and American farmers receive around 35% more subsidy than Indian farmers. In contrast, farmers in Punjab typically own only two to two-and-a-half acres of land, making competition extremely difficult.”
He also warned that intellectual property provisions could prevent farmers from saving seeds for the next crop season. “Farmers may not be allowed to save seeds for the next crop season as seeds would come under patent protection. Farmers would effectively become customers of multinational corporations, and seed dealers would be required to obtain fresh licences. This agreement opens the doors for foreign companies to dominate the agricultural sector,” the Chief Minister said.
Taking a dig at the Prime Minister’s foreign engagements, the CM Bhagwant Singh Mann remarked, “The Prime Minister often travels to countries whose names many people have not even heard of. These visits appear to be well-orchestrated shows in small countries with populations of around 10,000. Instead of wandering in such countries, he should focus on listening to the voices of India’s 1.25 billion people.”
CM Bhagwant Singh Mann also referred to the Prime Minister’s appearance on a wildlife programme and stated that platforms such as the Discovery Channel were being used for self-promotion. Recalling historical experiences, he said that wheat imported from the United States had once brought the invasive weed “Congress grass,” which continues to cause problems in India.
The Chief Minister further expressed concern that the share of agriculture in the Union Budget had declined sharply. “Agriculture once received about 25% of the Union Budget, but it has now been reduced to around 7%. At the same time, Indian fruits and agricultural products face strict testing abroad, while products imported from the US are often cleared through laboratories approved there,” he observed.
CM Bhagwant Singh Mann also stated that opposition voices are frequently suppressed when they raise issues in Parliament. He remarked that instead of making India a “Vishwaguru,” Modi government risks becoming a “Vishwa Chela.”
He said the Centre’s approach toward Punjab has reflected consistent neglect. “While Punjab did not receive adequate funds during floods, financial aid was provided to Afghanistan. The Centre has also been withholding funds related to the Rural Development Fund (RDF), GST and the National Health Mission from Punjab.”
The Chief Minister also stated that attempts to take control of Chandigarh and Panjab University would not be tolerated. He added that most decisions in the central government appear to be concentrated in the hands of only two leaders, the Prime Minister and the Home Minister.
CM Bhagwant Singh Mann said that when he approached Union ministers regarding the lifting of food grain stocks and the supply of fertilizers, they responded that approval was required from the top leadership. He also expressed concern about India’s foreign policy, stating that even at several international events the Prime Minister was not invited, which reflected poorly on the country’s standing.
He also criticized the decision to allow 51% Foreign Direct Investment in the defence sector despite earlier opposition to FDI. “Instead of changing the names of government buildings and cities, the Centre should focus on improving the lives of people,” the Chief Minister asserted.
CM Bhagwant Singh Mann stated that criticizing the Prime Minister is a democratic right and that anyone speaking against the government should not be labelled anti-national. He also remarked that agencies such as the ED and CBI are being misused for political purposes and that the voice of democracy is being stifled.
Referring to several political leaders in Punjab, he said that figures such as Captain Amarinder Singh, Sunil Jakhar, Manpreet Singh Badal, Partap Singh Bajwa and Ravneet Singh Bittu remain silent on the injustice being done to Punjab and Punjabis.
The Chief Minister concluded by urging farmers’ unions, agricultural experts and intellectuals to unite and raise their voices against the agreement. “It is the need of the hour to protect the future of Indian agriculture. Otherwise the Union government will plunder the rights of the country and its people and mortgage them before the US. Such a dastardly act is neither acceptable nor desirable,” CM Bhagwant Singh Mann added.
The Punjab Vidhan Sabha unanimously passed a condemnation resolution against the proposed India–US trade agreement.
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*ਭਾਰਤ-ਅਮਰੀਕਾ ਵਪਾਰ ਸਮਝੌਤਾ ਇੱਕ ਅਜਿਹਾ ਸਮਝੌਤਾ ਹੈ ਜੋ ਪੰਜਾਬ ਅਤੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਬਰਬਾਦ ਕਰ ਦੇਵੇਗਾ: ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ*
*ਭਾਰਤ-ਅਮਰੀਕਾ ਵਪਾਰ ਸਮਝੌਤਾ ਤਿੰਨ ਕਾਲੇ ਖੇਤੀ ਕਾਨੂੰਨਾਂ ਨਾਲੋਂ ਵੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਖ਼ਤਰਨਾਕ-ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ*
*ਭਾਰਤ ਦੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਬਾਜ਼ਾਰ ਨੂੰ ਅਮਰੀਕਾ ਲਈ ਖੋਲ੍ਹ ਕੇ ਮੋਦੀ ਸਰਕਾਰ ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਵਿਦੇਸ਼ੀ ਤਾਕਤਾਂ ਦੇ ਰਹਿਮੋ-ਕਰਮ ‘ਤੇ ਛੱਡਣ ਦਾ ਲਾਇਸੈਂਸ ਜਾਰੀ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ: ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ*
*ਡੋਨਾਲਡ ਟਰੰਪ ਨੂੰ ਪਤਾ ਨਹੀਂ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਮੋਦੀ ਦੀ ਕਿਹੜੀ ਕਮਜ਼ੋਰੀ ਦਾ ਪਤਾ ਲੱਗ ਗਿਆ ਹੈ, ਜੋ ਅਮਰੀਕਾ ਉਨ੍ਹਾਂ ਤੋਂ ਜੋ ਚਾਹੁੰਦਾ ਕਰਵਾ ਰਿਹੈ? ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ*
*ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਆਰਡੀਐਫ, ਜੀਐਸਟੀ ਅਤੇ ਐਨਐਚਐਮ ਫੰਡਾਂ ਨੂੰ ਰੋਕ ਕੇ ਮੋਦੀ ਸਰਕਾਰ ਕਿਸਾਨ ਅੰਦੋਲਨ ਦਾ ਬਦਲਾ ਲੈ ਰਹੀ ਹੈ: ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ*
*ਜਦੋਂ ਅਮਰੀਕੀ ਸੋਇਆਬੀਨ, ਮੱਕੀ, ਨਰਮਾ ਅਤੇ ਹੋਰ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਉਤਪਾਦ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਸਸਤੇ ‘ਚ ਵਿਕਣ ਲੱਗੇ ਤਾਂ ਸਾਡੇ ਕਿਸਾਨ ਇਸਦਾ ਮੁਕਾਬਲਾ ਕਿਵੇਂ ਕਰਨਗੇ? ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ*
*ਕੀ ਭਾਰਤ ਨੂੰ ਵਾਸ਼ਿੰਗਟਨ ਦੇ ਵ੍ਹਾਈਟ ਹਾਊਸ ਤੋਂ ਚਲਾਇਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ ਜੋ ਇਹ ਸਾਨੂੰ ਰੂਸ ਤੋਂ ਤੇਲ ਖਰੀਦਣ ਦੀ ਇਜਾਜ਼ਤ ਦੇ ਰਿਹੈ? ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ*
*ਪੰਜਾਬ ਵਿਧਾਨ ਸਭਾ ਵੱਲੋਂ ਭਾਰਤ-ਅਮਰੀਕਾ ਵਪਾਰ ਸਮਝੌਤੇ ਵਿਰੁੱਧ ਸਰਬਸੰਮਤੀ ਨਾਲ ਨਿੰਦਾ ਮਤਾ ਪਾਸ*
CHANDIGARH/MOHALI/SANGHOL-TIMES/JATINDER PAL SINGH/10th March,2026:
ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਅੱਜ ਚਿਤਾਵਨੀ ਦਿੰਦਿਆਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪ੍ਰਸਤਾਵਿਤ ਭਾਰਤ-ਅਮਰੀਕਾ ਵਪਾਰ ਸਮਝੌਤਾ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਸੈਕਟਰ ਨੂੰ ਤਿੰਨ ਕਾਲੇ ਖੇਤੀ ਕਾਨੂੰਨਾਂ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਕਰਕੇ ਇਤਿਹਾਸਕ ਕਿਸਾਨ ਅੰਦੋਲਨ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋਇਆ ਸੀ, ਨਾਲੋਂ ਕਿਤੇ ਵੱਧ ਨੁਕਸਾਨ ਪਹੁੰਚਾ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਮੰਤਰੀ ਗੁਰਮੀਤ ਸਿੰਘ ਖੁੱਡੀਆਂ ਵੱਲੋਂ ਪੇਸ਼ ਕੀਤੇ ਗਏ ਮਤੇ ‘ਤੇ ਬਹਿਸ ਨੂੰ ਸਮੇਟਦਿਆਂ ਪੰਜਾਬ ਵਿਧਾਨ ਸਭਾ ‘ਚ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਚਿਤਾਵਨੀ ਦਿੱਤੀ ਕਿ ਭਾਰੀ ਸਬਸਿਡੀ ਵਾਲੇ ਅਮਰੀਕੀ ਉਤਪਾਦਾਂ ਲਈ ਭਾਰਤ ਦਾ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਬਾਜ਼ਾਰ ਖੋਲ੍ਹਣ ਨਾਲ ਪੰਜਾਬ ਅਤੇ ਦੇਸ਼ ਭਰ ਦੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਇਸਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਲਈ ਹੱਦੋਂ ਵੱਧ ਜੱਦੋ-ਜਹਿਦ ਕਰਨੀ ਪਵੇਗੀ।
ਵਪਾਰ ਸਮਝੌਤੇ ਨੂੰ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਪ੍ਰਭੂਸੱਤਾ ਲਈ ਵੱਡਾ ਖ਼ਤਰਾ ਕਰਾਰ ਦਿੰਦਿਆਂ,ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਹ ਸਮਝੌਤਾ ਭਾਰਤ ਦੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਖੇਤਰ ਨੂੰ ਵਿਦੇਸ਼ੀ ਤਾਕਤਾਂ ਦੇ ਰਹਿਮੋ-ਕਰਮ ‘ਤੇ ਛੱਡ ਦੇਵੇਗਾ। ਇਸ ਸਮਝੌਤੇ ਦੇ ਬੇਹੱਦ ਮਾੜੇ ਸੰਭਾਵੀ ਪ੍ਰਭਾਵਾਂ ਨੂੰ ਵੇਖਦਿਆਂ ਪੰਜਾਬ ਵਿਧਾਨ ਸਭਾ ਵੱਲੋਂ ਸਰਬਸੰਮਤੀ ਨਾਲ ਇਸ ਪ੍ਰਸਤਾਵਿਤ ਸਮਝੌਤੇ ਵਿਰੁੱਧ ਨਿੰਦਾ ਮਤਾ ਪਾਸ ਕੀਤਾ ਗਿਆ।
ਸਦਨ ਨੂੰ ਸੰਬੋਧਨ ਕਰਦਿਆਂ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਭਾਰਤ-ਅਮਰੀਕਾ ਸਮਝੌਤਾ ਮੋਦੀ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਲਿਆਂਦੇ ਗਏ ਤਿੰਨ ਕਾਲੇ ਖੇਤੀ ਕਾਨੂੰਨਾਂ ਨਾਲੋਂ ਵੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਖ਼ਤਰਨਾਕ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਭਾਰਤ ਦੀ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਨੂੰ ਬੁਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨੁਕਸਾਨ ਪਹੁੰਚਾ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪਹਿਲਾਂ ਈਸਟ ਇੰਡੀਆ ਕੰਪਨੀ ਨੇ ਭਾਰਤ ਉੱਤੇ ਕਬਜ਼ਾ ਕਰਕੇ ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਲੁੱਟਿਆ ਸੀ ਅਤੇ ਹੁਣ ‘ਵੈਸਟ ਇੰਡੀਆ ਕੰਪਨੀ’ ਨੇ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਘੁਸਪੈਠ ਕਰਨੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤੀ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਹ ਸਮਝੌਤਾ ਭਾਰਤੀ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਨੂੰ ਤਬਾਹ ਕਰ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਕਰਕੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਖੇਤਰ ਨੂੰ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ।
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਅੱਗੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਸ ਪ੍ਰਸਤਾਵਿਤ ਸਮਝੌਤੇ ਬਾਰੇ ਸਬੰਧਤ ਰਾਜਾਂ ਨਾਲ ਨਾ ਤਾਂ ਸਲਾਹ ਕੀਤੀ ਗਈ ਅਤੇ ਨਾ ਹੀ ਇਸ ਬਾਰੇ ਕੁਝ ਦੱਸਿਆ ਗਿਆ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਭਾਰਤ-ਅਮਰੀਕਾ ਸਮਝੌਤੇ ਬਾਰੇ ਹੁਣ ਤੱਕ ਕਿਸੇ ਵੀ ਰਾਜ ਸਰਕਾਰ ਨਾਲ ਸਲਾਹ-ਮਸ਼ਵਰਾ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ ਅਤੇ ਨਾ ਹੀ ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਕੁਝ ਦੱਸਿਆ ਗਿਆ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪਤਾ ਨਹੀਂ ਇਸ ਮਾਮਲੇ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਜੀ ਦੀ ਕੀ ਮਜਬੂਰੀ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਸਨੇ ਸਾਰਿਆਂ ਨੂੰ ਇਹ ਸੋਚਣ ਲਈ ਮਜ਼ਬੂਰ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਹੈ ਕਿ ਕੀ ਭਾਰਤ ਦੇ ਫੈਸਲੇ ਹੁਣ ਵ੍ਹਾਈਟ ਹਾਊਸ ਦੇ ਦਖ਼ਸ ਨਾਲ ਹੋ ਰਹੇ ਹਨ ਅਤੇ ਕੀ ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰ ਦਾ ਰਿਮੋਟ ਵਿਦੇਸ਼ੀ ਤਾਕਤਾਂ ਦੇ ਹੱਥ ਵਿੱਚ ਹੈ।
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਅੱਗੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਜਿਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਵੱਡੀ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਗੱਲ ਵੀ ਵਿਦੇਸ਼ ਦੇ ਆਗੂਆਂ ਨਾਲ ਸਾਂਝੀ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ, ਇਹ ਆਪਣੇ ਆਪ ਵਿੱਚ ਗੰਭੀਰ ਸਵਾਲ ਖੜ੍ਹੇ ਕਰਦਾ ਹੈ। ਉਨ ਕਿਹਾ ਕਿ ਜਦੋਂ ਭਾਰਤ-ਪਾਕਿਸਤਾਨ ਜੰਗਬੰਦੀ ਹੋਈ ਸੀ,ਤਾਂ ਇਹ ਜਾਣਕਾਰੀ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਡੋਨਾਲਡ ਟਰੰਪ ਵੱਲੋਂ ਇੱਕ ਟਵੀਟ ਰਾਹੀਂ ਸਾਂਝੀ ਕੀਤੀ ਗਈ ਸੀ, ਜਦਕਿ ਭਾਰਤ ਨੂੰ ਬਾਅਦ ਵਿੱਚ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪਤਾ ਲੱਗਾ। ਇਹ ਸਥਿਤੀ ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰ ਦੇ ਕੰਮਕਾਜ ‘ਤੇ ਵੱਡਾ ਸਵਾਲੀਆ ਨਿਸ਼ਾਨ ਲਾਉਂਦੀ ਹੈ।
ਸਮਝੌਤੇ ਦੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਪ੍ਰਭਾਵਾਂ ‘ਤੇ ਚਿੰਤਾ ਪ੍ਰਗਟ ਕਰਦਿਆਂ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਡੀਡੀਜੀਐਸ ਅਤੇ ਸੋਇਆਬੀਨ ਤੇਲ ਵਰਗੇ ਫੀਡ ਬਦਲਾਂ ਦੀ ਸਸਤੀ ਦਰਾਮਦ ਮੱਕੀ ਅਤੇ ਸੋਇਆਬੀਨ ਦੀਆਂ ਕੀਮਤਾਂ ਨੂੰ ਕਾਫ਼ੀ ਹੱਦ ਤੱਕ ਘਟਾ ਸਕਦੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਫਸਲੀ ਵਿਭਿੰਨਤਾ ਯਤਨਾਂ ਨੂੰ ਵੱਡੀ ਮਾਰ ਪੈ ਸਕਦੀ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਅੱਗੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਭਾਵੇਂ ਨਰਮੇ ਦੀ ਦਰਾਮਦ ਨੂੰ ਕੋਟੇ ਰਾਹੀਂ ਨਿਯੰਤ੍ਰਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਫਿਰ ਵੀ ਇਹ ਨਰਮੇ ਦੀਆਂ ਕੀਮਤਾਂ ਦੇ ਹੇਠਾਂ ਜਾਣ ਦਾ ਕਾਰਨ ਬਣ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਮਾਲਵਾ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਨਰਮਾ ਕਿਸਾਨਾਂ ‘ਤੇ ਮਾੜਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪੈ ਸਕਦਾ ਹੈ।
ਉਨ੍ਹਾਂ ਚਿਤਾਵਨੀ ਦਿੱਤੀ ਕਿ ਕੁਝ ਨਾਨ-ਟੈਰਿਫ ਸ਼ਰਤਾਂ ਵਿੱਚ ਢਿੱਲ ਦੇਣ ਨਾਲ ਇਹ ਜੀਐਮਓ ਸਮੱਗਰੀ ਦੇ ਦਾਖਲੇ ਅਤੇ ਨਵੇਂ ਕੀੜਿਆਂ, ਫਸਲੀ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਅਤੇ ਖਤਰਨਾਕ ਨਦੀਨਾਂ ਦੇ ਫੈਲਣ ਦੇ ਜੋਖਮ ਨੂੰ ਵਧਾ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਅਜਿਹੇ ਹਾਲਾਤ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਈਕੋਸਿਸਟਮ ਲਈ ਗੰਭੀਰ ਖ਼ਤਰਾ ਪੈਦਾ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਨ।
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਅੱਗੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸੰਯੁਕਤ ਰਾਜ ਅਮਰੀਕਾ ਵਿੱਚ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਢਾਂਚਾ ਭਾਰਤ ਨਾਲੋਂ ਕਾਫ਼ੀ ਵੱਖਰਾ ਹੈ। ਅਮਰੀਕਾ ਦੀ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਖੁੱਲ੍ਹੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ, ਉੱਚ ਸਬਸਿਡੀਆਂ ਅਤੇ ਪੈਮਾਨੇ ਦੀ ਆਰਥਿਕਤਾ ‘ਤੇ ਕੰਮ ਕਰਦੀ ਹੈ, ਜੋ ਉਤਪਾਦਕਾਂ ਨੂੰ ਘੱਟ ਕੀਮਤਾਂ ‘ਤੇ ਵੀ ਨਿਰਯਾਤ ਦੇ ਯੋਗ ਬੇਣਾਉਂਦਾ ਹੈ। ਅਜਿਹੀ ਸਥਿਤੀ ਵਿੱਚ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਲਈ ਅਮਰੀਕੀ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਉਤਪਾਦਾਂ ਨਾਲ ਮੁਕਾਬਲਾ ਕਰਨਾ ਬੇਹੱਦ ਮੁਸ਼ਕਿਲ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ।
ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਅਮਰੀਕਾ ਤੋਂ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੇ ਚਾਰੇ ਲਈ ਸੋਇਆ ਫੀਡ ਕਥਿਤ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਵੱਡੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਆਯਾਤ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ। “ਪੰਜਾਬ ਲਗਭਗ 1.25 ਲੱਖ ਹੈਕਟੇਅਰ ਮੱਕੀ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਕਰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਸਮਝੌਤੇ ਨਾਲ ਮੱਕੀ ਅਤੇ ਸੋਇਆਬੀਨ ਦੋਵੇਂ
ਫਸਲਾਂ ‘ਤੇ ਬੇਹੱਦ ਮਾੜਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪੈ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਅਮਰੀਕਾ ਤੋਂ ਨਰਮੇ ਦੀ ਦਰਾਮਦ ਪੰਜਾਬ, ਜਿੱਥੇ ਲਗਭਗ 2.5 ਲੱਖ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਨਰਮੇ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਦੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਕਰ ਸਕਦੀ ਹੈ।
ਖੇਤਾਂ ਦੇ ਆਕਾਰ ਅਤੇ ਸਬਸਿਡੀਆਂ ਵਿੱਚ ਅਸਮਾਨਤਾ ਨੂੰ ਉਜਾਗਰ ਕਰਦਿਆਂ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਕਿਹਾਕਿ ਅਮਰੀਕਾ ਵਿੱਚ ਔਸਤ ਕਿਸਾਨ ਕੋਲ ਲਗਭਗ 500 ਏਕੜ ਜ਼ਮੀਨ ਹੈ ਅਤੇ ਅਮਰੀਕੀ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਭਾਰਤੀ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨਾਲੋਂ ਲਗਭਗ 35 ਫੀਸਦ ਵੱਧ ਸਬਸਿਡੀ ਮਿਲਦੀ ਹੈ। ਇਸ ਦੇ ਉਲਟ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਕੋਲ ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਸਿਰਫ਼ ਦੋ ਤੋਂ ਢਾਈ ਏਕੜ ਜ਼ਮੀਨ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਉਨ੍ਹਾਂ ਲਈ ਅਮਰੀਕੀ ਉਤਪਾਦਾਂ ਦਾ ਮੁਕਾਬਲਾ ਕਰਨਾ ਅਤਿ ਮੁਸ਼ਕਲ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ।
ਉਨ੍ਹਾਂ ਇਹ ਵੀ ਚੇਤਾਵਨੀ ਦਿੱਤੀ ਕਿ ਇੰਟਲੈਕਚੂਅਲ ਪ੍ਰੋਪਰਟੀ ਪ੍ਰੋਵੀਜਨਸ ਕਾਰਨ ਕਿਸਾਨ ਅਗਲੇ ਫਸਲੀ ਸੀਜ਼ਨ ਲਈ ਬੀਜ ਨਹੀਂ ਬਚਾ ਸਕਣਗੇ। ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਕਿਹਾ, “ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਅਗਲੇ ਫਸਲੀ ਸੀਜ਼ਨ ਲਈ ਬੀਜ ਬਚਾਉਣ ਦੀ ਇਜਾਜ਼ਤ ਨਹੀਂ ਦਿੱਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਕਿਉਂਕਿ ਬੀਜ ਪੇਟੈਂਟ ਸੁਰੱਖਿਆ ਅਧੀਨ ਆ ਜਾਣਗੇ। ਕਿਸਾਨ ਇਸ ਨਾਲ ਬਹੁ-ਰਾਸ਼ਟਰੀ ਕਾਰਪੋਰੇਸ਼ਨਾਂ ਦੇ ਗਾਹਕ ਬਣ ਜਾਣਗੇ ਅਤੇ ਬੀਜ ਡੀਲਰਾਂ ਨੂੰ ਨਵੇਂ ਲਾਇਸੈਂਸ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਦੀ ਲੋੜ ਹੋਵੇਗੀ। ਇਸ ਸਮਝੌਤੇ ਨਾਲ ਵਿਦੇਸ਼ੀ ਕੰਪਨੀਆਂ ਨੂੰ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਸੈਕਟਰ ਵਿੱਚ ਪੈਰ ਪਸਾਰਨ ਦਾ ਮੌਕਾ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ।”
ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਦੇ ਵਿਦੇਸ਼ੀ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮਾਂ ‘ਤੇ ਚੁਟਕੀ ਲੈਂਦਿਆਂ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਟਿੱਪਣੀ ਕੀਤੀ, “ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਅਕਸਰ ਅਜਿਹੇ ਦੇਸ਼ਾਂ ਦਾ ਦੌਰਾ ਕਰਦੇ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਨਾਮ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਲੋਕਾਂ ਨੇ ਕਦੇ ਸੁਣਿਆ ਵੀ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ। ਇਹ ਦੌਰੇ ਲਗਭਗ 10,000 ਦੀ ਆਬਾਦੀ ਵਾਲੇ ਛੋਟੇ ਦੇਸ਼ਾਂ ਵਿੱਚ ਕਰਵਾਏ ਸ਼ੋਅ ਜਾਪਦੇ ਹਨ। ਅਜਿਹੇ ਦੇਸ਼ਾਂ ਵਿੱਚ ਘੁੰਮਣ ਦੀ ਬਜਾਏ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਭਾਰਤ ਦੇ 1.25 ਅਰਬ ਲੋਕਾਂ ਦੀਆਂ ਆਵਾਜ਼ਾਂ ਸੁਣਨ ‘ਤੇ ਧਿਆਨ ਕੇਂਦਰਿਤ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ।”
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਦੇ ਜੰਗਲੀ ਜੀਵ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਵਿੱਚ ਆਉਣ ਦਾ ਵੀ ਜ਼ਿਕਰ ਕੀਤਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਡਿਸਕਵਰੀ ਚੈਨਲ ਵਰਗੇ ਪਲੇਟਫਾਰਮਾਂ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਪ੍ਰਚਾਰ ਲਈ ਵਰਤਿਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਸੀ। ਇਤਿਹਾਸਕ ਘਟਨਾ ਨੂੰ ਯਾਦ ਕਰਦਿਆਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇੱਕ ਵਾਰ ਅਮਰੀਕਾ ਤੋਂ ਆਯਾਤ ਕੀਤੀ ਗਈ ਕਣਕ ਖਤਰਨਾਕ “ਕਾਂਗਰਸ ਬੂਟੀ” ਲੈ ਕੇ ਆਈ ਸੀ, ਜੋ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਸਮੱਸਿਆ ਬਣੀ ਹੋਈ ਹੈ।
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਅੱਗੇ ਚਿੰਤਾ ਪ੍ਰਗਟ ਕੀਤੀ ਕਿ ਕੇਂਦਰੀ ਬਜਟ ਵਿੱਚ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਦੇ ਹਿੱਸੇ ਵਿੱਚ ਵੱਡੀ ਕਟੌਤੀ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ, “ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਨੂੰ ਕਦੇ ਕੇਂਦਰੀ ਬਜਟ ਦਾ ਲਗਭਗ 25 ਫ਼ੀਸਦ ਹਿੱਸਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਸੀ, ਪਰ ਹੁਣ ਇਹ ਘਟਾ ਕੇ ਲਗਭਗ 7 ਫ਼ੀਸਦ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਹੈ।” ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਹੀ, ਭਾਰਤੀ ਫਲਾਂ ਅਤੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਉਤਪਾਦਾਂ ਨੂੰ ਵਿਦੇਸ਼ਾਂ ਵਿੱਚ ਸਖ਼ਤ ਟੈਸਟਿੰਗ ਦਾ ਸਾਹਮਣਾ ਕਰਨਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ, ਜਦੋਂ ਕਿ ਅਮਰੀਕਾ ਤੋਂ ਆਯਾਤ ਕੀਤੇ ਗਏ ਉਤਪਾਦਾਂ ਨੂੰ ਅਕਸਰ ਉੱਥੇ ਪ੍ਰਵਾਨਿਤ ਲੈਬਾਂ ਰਾਹੀਂ ਹੀ ਪ੍ਰਵਾਨਗੀ ਦੇ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।”
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਇਹ ਵੀ ਕਿਹਾ ਕਿ ਜਦੋਂ ਵਿਰੋਧੀ ਧਿਰ ਸੰਸਦ ਵਿੱਚ ਮੁੱਦੇ ਉਠਾਉਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਆਵਾਜ਼ਾਂ ਨੂੰ ਅਕਸਰ ਦਬਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਟਿੱਪਣੀ ਕੀਤੀ ਕਿ ਭਾਰਤ ਨੂੰ “ਵਿਸ਼ਵ ਗੁਰੂ” ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਬਜਾਏ, ਮੋਦੀ ਸਰਕਾਰ “ਵਿਸ਼ਵ ਚੇਲਾ” ਬਣਨ ਵੱਲ ਵੱਧ ਰਹੀ ਹੈ।
ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਕੇਂਦਰ ਦਾ ਪੰਜਾਬ ਪ੍ਰਤੀ ਨਜ਼ਰੀਆ ਸੂਬੇ ਨਾਲ ਵਰਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਅਣਗਹਿਲੀ ਨੂੰ ਦਰਸਾਉਂਦਾ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ, “ਹਾਲਾਂਕਿ ਹੜ੍ਹਾਂ ਦੌਰਾਨ ਪੰਜਾਬ ਨੂੰ ਢੁਕਵੇਂ ਫੰਡ ਨਹੀਂ ਮਿਲੇ, ਪਰ ਅਫਗਾਨਿਸਤਾਨ ਨੂੰ ਵਿੱਤੀ ਸਹਾਇਤਾ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕੀਤੀ ਗਈ। ਕੇਂਦਰ ਨੇ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਪੇਂਡੂ ਵਿਕਾਸ ਫੰਡ (ਆਰਡੀਐਫ), ਜੀਐਸਟੀ ਅਤੇ ਰਾਸ਼ਟਰੀ ਸਿਹਤ ਮਿਸ਼ਨ ਨਾਲ ਸਬੰਧਤ ਫੰਡ ਅਜੇ ਤੱਕ ਜਾਰੀ ਨਹੀਂ ਕੀਤੇ।”
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਇਹ ਵੀ ਕਿਹਾ ਕਿ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਅਤੇ ਪੰਜਾਬ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ‘ਤੇ ਕਬਜ਼ਾ ਕਰਨ ਦੀਆਂ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਬਰਦਾਸ਼ਤ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਅੱਗੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਹ ਜਾਪਦਾ ਹੈ ਕਿ ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰ ਵਿੱਚ ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਫੈਸਲੇ ਸਿਰਫ਼ ਦੋ ਨੇਤਾਵਾਂ, ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਅਤੇ ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰੀ ਵੱਲੋਂ ਹੀ ਲਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ।
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਜਦੋਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਅਨਾਜ ਭੰਡਾਰਾਂ ਦੀ ਲਿਫਟਿੰਗ ਅਤੇ ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਸਪਲਾਈ ਸਬੰਧੀ ਕੇਂਦਰੀ ਮੰਤਰੀਆਂ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕੀਤਾ ਤਾਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਜਵਾਬ ਦਿੱਤਾ ਕਿ ਇਸ ਸਬੰਧੀ ਉੱਚ ਲੀਡਰਸ਼ਿਪ ਤੋਂ ਪ੍ਰਵਾਨਗੀ ਦੀ ਲੋੜ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਭਾਰਤ ਦੀ ਵਿਦੇਸ਼ ਨੀਤੀ ਬਾਰੇ ਵੀ ਚਿੰਤਾ ਪ੍ਰਗਟ ਕੀਤੀ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਕਈ ਅੰਤਰਰਾਸ਼ਟਰੀ ਸਮਾਗਮਾਂ ਵਿੱਚ ਵੀ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੂੰ ਸੱਦਾ ਨਹੀਂ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ, ਜੋ ਕਿ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ‘ਤੇ ਮਾੜਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪਾਉਂਦਾ ਹੈ।
ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਐਫਡੀਆਈ ਦੇ ਪਹਿਲਾਂ ਵਾਲੇ ਵਿਰੋਧ ਦੇ ਬਾਵਜੂਦ ਰੱਖਿਆ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ 51 ਫੀਸਦ ਸਿੱਧੇ ਵਿਦੇਸ਼ੀ ਨਿਵੇਸ਼ ਦੀ ਆਗਿਆ ਦੇਣ ਦੇ ਫੈਸਲੇ ਦੀ ਵੀ ਆਲੋਚਨਾ ਕੀਤੀ। ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਕਿਹਾ, “ਸਰਕਾਰੀ ਇਮਾਰਤਾਂ ਅਤੇ ਸ਼ਹਿਰਾਂ ਦੇ ਨਾਮ ਬਦਲਣ ਦੀ ਬਜਾਏ, ਕੇਂਦਰ ਨੂੰ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਜੀਵਨ ਨੂੰ ਬਿਹਤਰ ਬਣਾਉਣ ‘ਤੇ ਧਿਆਨ ਕੇਂਦਰਿਤ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ।”
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਦੀ ਆਲੋਚਨਾ ਕਰਨਾ ਇੱਕ ਲੋਕਤੰਤਰੀ ਅਧਿਕਾਰ ਹੈ ਅਤੇ ਸਰਕਾਰ ਵਿਰੁੱਧ ਬੋਲਣ ਵਾਲੇ ਕਿਸੇ ਵੀ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਦੇਸ਼ ਵਿਰੋਧੀ ਨਹੀਂ ਕਿਹਾ ਜਾਣਾ ਚਾਹੀਦਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਇਹ ਵੀ ਟਿੱਪਣੀ ਕੀਤੀ ਕਿ ਈਡੀ ਅਤੇ ਸੀਬੀਆਈ ਵਰਗੀਆਂ ਏਜੰਸੀਆਂ ਦੀ ਰਾਜਨੀਤਿਕ ਉਦੇਸ਼ਾਂ ਲਈ ਦੁਰਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ ਅਤੇ ਲੋਕਤੰਤਰ ਦੀ ਆਵਾਜ਼ ਨੂੰ ਦਬਾਇਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ।
ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਕਈ ਰਾਜਨੀਤਿਕ ਆਗੂਆਂ ਦਾ ਹਵਾਲਾ ਦਿੰਦਿਆਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਕੈਪਟਨ ਅਮਰਿੰਦਰ ਸਿੰਘ, ਸੁਨੀਲ ਜਾਖੜ, ਮਨਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ ਬਾਦਲ, ਪ੍ਰਤਾਪ ਸਿੰਘ ਬਾਜਵਾ ਅਤੇ ਰਵਨੀਤ ਸਿੰਘ ਬਿੱਟੂ ਵਰਗੀਆਂ ਹਸਤੀਆਂ ਨੇ ਪੰਜਾਬ ਅਤੇ ਪੰਜਾਬੀਆਂ ਨਾਲ ਹੋ ਰਹੇ ਅਨਿਆਂ ‘ਤੇ ਚੁੱਪੀ ਸਾਧੀ ਹੋਈ ਹੈ।
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਅੰਤ ਵਿੱਚ ਕਿਸਾਨ ਯੂਨੀਅਨਾਂ, ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਮਾਹਿਰਾਂ ਅਤੇ ਬੁੱਧੀਜੀਵੀਆਂ ਨੂੰ ਇਸ ਸਮਝੌਤੇ ਵਿਰੁੱਧ ਇੱਕਜੁੱਟ ਹੋਣ ਅਤੇ ਆਪਣੀ ਆਵਾਜ਼ ਬੁਲੰਦ ਕਰਨ ਦੀ ਅਪੀਲ ਕੀਤੀ। ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਅੱਗੇ ਕਿਹਾ, “ਭਾਰਤੀ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਦੇ ਭਵਿੱਖ ਦੀ ਰੱਖਿਆ ਕਰਨਾ ਸਮੇਂ ਦੀ ਲੋੜ ਹੈ। ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰ ਦੇਸ਼ ਅਤੇ ਇਸਦੇ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਅਧਿਕਾਰਾਂ ਨੂੰ ਲੁੱਟ ਲਵੇਗੀ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਅਮਰੀਕਾ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਗਿਰਵੀ ਰੱਖ ਦੇਵੇਗੀ। ਅਜਿਹਾ ਮਾੜੇ ਕੰਮ ਨਾ ਤਾਂ ਸਵੀਕਾਰਯੋਗ ਹੈ ਅਤੇ ਨਾ ਹੀ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਹਨ।”
ਪੰਜਾਬ ਵਿਧਾਨ ਸਭਾ ਨੇ ਪ੍ਰਸਤਾਵਿਤ ਭਾਰਤ-ਅਮਰੀਕਾ ਵਪਾਰ ਸਮਝੌਤੇ ਵਿਰੁੱਧ ਸਰਬਸੰਮਤੀ ਨਾਲ ਨਿੰਦਾ ਮਤਾ ਪਾਸ ਕੀਤਾ।
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