महिला आरक्षण बिल को तुरंत लागू करें सरकार – नंदिता हुडा
चंडीगढ़/संघोल टाइम्स/केवल भारती/26जुलाई, 2024 – अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष श्रीमती अलका लांबा के अध्यक्षता में महिला आरक्षण बिल को तुरंत लागू करने की मांग को लेकर, महंगाई को कम करने और महिला सुरक्षा की मांग को लेकर 29 जुलाई को दिल्ली में
सभी राज्यों से बहने पहुंच कर अपनी आवाज संसद तक पहुंचने के लिए शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन करेंगी।
न्याय का हक मिलने तक महिलाओं का यह संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।
पिछले कुछ सालों से महिला अपराध निरंतर बढ़ रहा है हाल ही में मध्य प्रदेश के रीवा में आप सबने देखा कैसे दबंगों ने दो बहनों को जमीन में जिंदा गाड़ने की कोशिश की।
मणिपुर, हाथरस, कठुआ, अंकिता भंडारी कितने सारे ऐसे केस हैं जिसमें अपराध की हर सीमा को लांघा गया। बिलकिस बानो के अपराधियों का जेल से छूटने पर फूल मालाओं से स्वागत ने सबको चौकाया ।यह कैसा अमृत काल है जहां महिलाओं का निरंतर अपमान हो रहा है ।
देश के लिए गौरव लाने वाली पहलवान बेटियों तक को सड़क पर घसीटने का काम इस सरकार के कार्यकाल में हुआ है और यह भी देखने में आया कि अपराधी अपने आप को संरक्षित महसूस करते हैं जैसे उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता। सरकार से यह भी अपील की जाएगी की महिला अपराध में शामिल लोगों को सुरक्षा देना बंद करें।
अपनी कुर्सी को बचाने वाले इस बजट में सरकार ने लगभग सभी वर्गों के हाथ में झुनझुना थमाने काम किया है।
आधी आबादी महिलाओं के लिए भी कुछ नहीं किया गया है महंगाई के चलते महिलाओं को घर चलाना मुश्किल हो रहा है । अतः हमारी अपील है बढ़ती महंगाई से सरकार राहत दे और महिलाओं की सशक्तिकरण के लिए कांग्रेस के मेनिफेस्टो से एक और बिंदु की कॉपी सरकार को कर लेनी चाहिए जो है ,”महालक्ष्मी योजना” जिसके तहत गरीब परिवार की बड़ी महिला के खाते में 8500 प्रति महीने भेजे जाने का प्रावधान सरकार तुरंत ही इस योजना को लागू करके शुरू करें।
1996 में पहली बार महिला आरक्षण बिल को पटल पर रखा गया और कई बार इसे गिराया गया। 2010 में निरंतर प्रयासों से राज्यसभा में पास हुआ । सरकार चाहती तो उसी बिल को लोकसभा में पास करके तुरंत प्रभाव से लागू कर सकती थी।
और अब 27 ,28 सालों के बाद जब यह बिल दोनों सदनों में पास हुआ है। तो लागू कब होगा ? इस बात का कोई पता नहीं तो हमारी मांग है कि इसे तुरंत प्रभाव से लागू करे ताकि आने वाले विधानसभा चुनाव में राज्य सरकारों में महिलाओं की भागीदारी 33% निर्धारित हो सके।
राजनीतिक भागीदारी ही एक ऐसा जरिया है जिससे महिलाओं को राष्ट्र की मुख्य धारा में जोड़ा जा सकता है। हमारा देश 1947 में आजाद हो गया था ।और पहली लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 4.4% था और अब 2024 में यह है 14 . 3% तक पहुंचा है महिला सशक्तिकरण को लेकर आज तक अगर कोई काम किया गया है तो वह है पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री राजीव गांधी जी के द्वारा महिलाओं को पंचायत में 33% का जो रिजर्वेशन दिया जाना। आज कुछ राज्यों में 50% प्रतिशत तक महिलाओं का पंचायतों में प्रतिनिधित्व है ।जहां भी महिलाओं को मौका मिला है उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया है ।चाहे वह क्षेत्र कोई भी हो।
भारतवर्ष की महिलाएं एक सजग नागरिक के रूप में राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए पूर्ण रूप से तैयार हैं ।आत्मविश्वास से भरपूर सभी महिलाएं गरिमा पूर्ण जीवन यापन कर सकेंगी
जब उनकी भागीदारी वहां सुनिश्चित होगी जहां उनके लिए नियम और कानून बनाए जाते हैं और उनको लागू करने में भी जब इनकी बराबर की जब हिस्सेदारी होगी।
अपने हक और स्वाभिमान की लड़ाई न्याय मिलने तक हम सड़क से संसद तक जारी रखेंगे।
नंदिता हुड्डा
