कुरुक्षेत्र के मथाना में बनेगा जैविक कृषि व आधुनिक प्रबंधन प्रणाली संस्थान, मुख्यमंत्री ने की घोषणा
संस्थान में होंगे कृषि साइंस के यूजी, पीजी से लेकर पीएचडी तक के कोर्स
कैथल-ढांड-पिपली-रादौर-यमुनानगर तक सड़क होगी फोरलेन
लाडवा में अब हर साल लगेगा कृषि विकास मेला
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने लाडवा उपमंडल सचिवालय के नए भवन तथा 9 नई सडक़ों का किया शिलान्यास
कृषि मेला ज्ञान, नवाचार और प्रेरणा का अनूठा संगम – मुख्यमंत्री
Chandigarh/SANGHOL-TIMES/JATINDER-PAL-SINGH/28FEB,2026- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कृषि विकास मेला लाडवा में घोषणा करते हुए बड़ी सौगातें दी हैं। गांव मथाना में 10 एकड़ भूमि पर जैविक कृषि व आधुनिक प्रबंधन प्रणाली संस्थान खोला जाएगा। इस संस्थान में कृषि साइंस के यूजी, पीजी से लेकर पीएचडी तक के कोर्स उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही कैथल से यमुनानगर वाया ढांड, पिपली, रादौर मार्ग को फोरलेन किए जाने की घोषणा की। यह फोरलेन मार्ग एनएच-152डी, एनएच-44 और शामली एक्सप्रेस-वे को जोड़ेगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने लाडवा उपमंडल सचिवालय के नए भवन, लोकनिर्माण विभाग की 9 सडक़ों का शिलान्यास भी किया।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की तरफ से लाडवा अनाज मंडी में आयोजित राज्य स्तरीय कृषि विकास मेले का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने ट्रैक्टर पर बैठकर विश्वविद्यालय व किसानों द्वारा लगाए गए स्टॉलों और कृषि मेले का अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री ने कृषि विकास मेला को हरियाणा की कृषि आत्मा का उत्सव बताया जो अन्नदाताओं के परिश्रम, संकल्प और नवाचार का महोत्सव है।
मुख्यमंत्री ने भव्य आयोजन के लिए विश्वविद्यालय और सभी आयोजकों को बधाई व शुभकामनाएं दी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने होली के पर्व की प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं भी दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री व कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री को चौधऱी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. बीआर काम्बोज ने स्मृति चिन्ह, शॉल व पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगतिशील किसानों ने नवाचारों से कृषि क्षेत्र को गति दी है, जो हमारे अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं। इस मेले का थीम जल संरक्षण प्रति बूंद से अधिक फसल रखा गया है। मौजूदा समय में बदलते जलवायु परिदृश्य, घटते भूजल स्तर और अनियमित वर्षा ने कृषि क्षेत्र के सामने अनेक नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ऐसे समय में जल संरक्षण पर केंद्रित यह मेला वास्तव में दूरदर्शी पहल है। प्रति बूंद अधिक फसल का अर्थ तकनीक के साथ हमारी सोच में परिवर्तन लाना भी है। उन्होंने कहा कि हमें समझना होगा कि पानी अनंत नहीं है। यह मेला किसानों को जल प्रबंधन की उन्नत तकनीकों से जोडक़र एक जन-आंदोलन का रूप लेगा।
वैज्ञानिक शोध को हर खेत व हर किसान तक पहुंचाएं
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक शोध को प्रयोगशाला तक सीमित न रखें, बल्कि हर खेत व हर किसान तक पहुंचाएं। किसान और वैज्ञानिक का सीधा संवाद ही कृषि को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है। यह मेला किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों, उन्नत बीजों, नई तकनीकों और वैज्ञानिक सलाह से जोडऩे का एक सशक्त मंच है। यहां पर 150 से अधिक स्टॉल्स, आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रदर्शन, मिट्टी और पानी की जांच सुविधा, रोगग्रस्त फसलों की जांच व निदान, फसल प्रतियोगिता, लक्की ड्रॉ, ये सब मिलकर इस मेले को ज्ञान, नवाचार और प्रेरणा का संगम बना रहे हैं।
सरकार का दृष्टिकोण किसान को अन्नदाता के साथ-साथ ऊर्जा दाता, रोजगार दाता और अर्थव्यवस्था का निर्माता बनाना है
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा कृषि प्रधान प्रदेश है। हमारी पहचान हमारे खेत-खलिहानों से है, हमारी समृद्धि हमारे किसान के पसीने से है। हरियाणा की धरती ने हमेशा देश को अन्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि हमारी डबल इंजन सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि ऊर्जा दाता, रोजगार दाता और अर्थव्यवस्था के निर्माता बने। इसलिए हमारी नीतियां केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसान की आय बढ़ाने, लागत घटाने और जोखिम को कम करने पर केंद्रित हैं।
धान की जगह वैकल्पिक फसलें बोने पर किसानों को 157 करोड़ रुपये की दी वित्तीय सहायता
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हमारे किसान ऐसी फसलों की पैदावार लें, जिसमें पानी की कम जरूरत होती है। सरकार ने ऐसी फसलों को बढ़ावा देने के लिए मेरा पानी-मेरी विरासत योजना वर्ष 2020 में शुरू की। इस योजना के तहत वैकल्पिक फसलें लेने या खेत खाली छोड़ने वाले किसानों को 8 हजार रुपये प्रति एकड़ वित्तीय सहायता दी जाती है। इस योजना के तहत 2 लाख 20 हजार एकड़ में धान की जगह वैकल्पिक फसलें बोने पर किसानों को 157 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई है। इसके अलावा पानी की बचत के लिए वर्षा जल संचयन, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो इरिगेशन तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। माइक्रो इरीगेशन तकनीकों पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है। किसानों को तालाब बनाने के लिए भी 85 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है।
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के शोधित पानी को सिंचाई के लिए इस्तेमाल करने की 11 योजनाएं पूरी
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के शोधित पानी को सिंचाई के लिए इस्तेमाल करने की 27 योजनाएं तैयार की हैं। इनमें से 11 पूरी हो चुकी हैं। इनसे सिंचाई के लिए एक स्थायी जल स्रोत मिलेगा, नहरों पर दबाव कम होगा और भूजल का दोहन भी घटेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने फसल अवशेष व पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए किसानों को जागरूक किया है और उन्हें पराली प्रबंधन के लिए 1 लाख से ज्यादा मशीनें दी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसान हित में नकली बीज व कीटनाशकों पर रोक लगाने के लिए कानून बनाया है। मुख्यमंत्री ने उपस्थित बीज व कीटनाशक बनाने वाली कंपनियों के प्रतिनिधियों से अनुरोध करते हुए कहा कि वे नकली बीज व कीटनाशकों की रोकथाम में सहयोग करें।
मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना में 21 फसलें को किया शामिल
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश के प्रगतिशील किसान भाइयों ने सब्जी व फलों की खेती करने के लिए नेट हाउस, पॉलीहाउस, हाइटेक ग्रीन नेट हाउस आदि आधुनिक तकनीकों को अपनाया है। सरकार ने बागवानी को बढ़ावा देने के लिए सब्जियों व फलों के लिए भावांतर भरपाई योजना लागू की है। इस योजना के तहत अब तक 35 हजार से अधिक किसानों को 157 करोड रुपये से अधिक की राशि भावांतर के रूप में दी है। उन्होंने कहा कि हरियाणा देश का पहला राज्य है, जिसने बागवानी किसानों को भी मौसम की अनिश्चितताओं के जोखिम से मुक्त किया है। इसके लिए मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना में 21 फसलें शामिल की गई हैं।
किसानों तक ड्रोन, रिमोट सेंसिंग, एआई आधारित निर्णय प्रणाली और डिजिटल खेती को पहुंचा रही सरकार
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि डिजिटल तकनीक ने खेती को बदल दिया है। ऐसे में सरकार ड्रोन, रिमोट सेंसिंग, एआई आधारित निर्णय प्रणाली और डिजिटल खेती जैसे नवाचारों को किसान भाइयों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। सरकार ने पारदर्शी खरीद प्रणाली, समय पर भुगतान और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में कार्य किया है। यह कृषि विकास मेला उसी दिशा में एक मजबूत कदम है। यहां से जो ज्ञान, जो प्रेरणा, जो ऊर्जा आप लेकर जाएंगे, वह आपके खेतों में नई कहानी लिखेगी।
विश्व भर के लिए धान की फसल का उत्पादन करता है हरियाणा प्रदेश : श्याम सिंह राणा
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि हरियाणा विश्व भर के लिए धान की फसल का उत्पादन करता है। हमारा देश दालों को दूसरे देश से मंगवाता है। अब किसानों को रुटीन की फसलों को छोडक़र अन्य फसलों का उत्पादन करना है। इसके साथ ही सबसे ज्यादा पानी की लागत वाली धान की फसल में तकनीक व सीधी बिजाई का इस्तेमाल करके पैदावार लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों को समृद्ध बनाने के लिए पशुपालन, मछली पालन, सब्जी उत्पादन जैसे विकल्प को शामिल किया है। सरकार पशुपालन को बढ़ावा दे रही है।
उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार लगातार योजनाएं बना रही है। इन योजनाओं को वर्ष 2047 विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि हमारे बुजुर्ग अपने समय में सभी फसलों की पैदावार लिया करते थे। अब भी उसी पद्धति को अपनाने की जरूरत है।
एचएयू ने लगभग 50 किस्मों पर किया सफल अनुसंधान
कृषि विभाग के प्रधान सचिव पंकज अग्रवाल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इसके साथ ही विभाग की योजनाओं को विस्तार से बताया।
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कुलपति प्रो. डा. बीआर काम्बोज ने कहा कि एचएयू ने अपने कैंपस के बाहर पहली बार मेले का आयोजन किया है। उन्होंने संस्थान की तरफ से बाजरा, गन्ना, धान सहित लगभग 50 किस्मों पर सफल अनुसंधान किया है। किसानों को धान की सीधी बिजाई के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने महिला प्रगतिशील किसानों को किया सम्मानित
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कृषि विकास मेले में प्रदेश की प्रगतिशील महिला किसान को सम्मानित किया। इनमें करनाल के गांव औगंध से काजल, मण्डकोला के गांव मीरपुर कौराली से इंदिरा देवी, हिसार के आदमपुर से रेखा, भिवानी के गांव नाथूवास से मुन्नी बाई, यमुनानगर के गांव बहादुरपुर से रजनी, पानीपत के गांव बसाड़ा से पुष्पा देवी, महेन्द्रगढ़ के गांव गुढ़ा से नीतू यादव, जींद के गांव इक्कस से निर्मला, कैथल के गांव बाता से पूजा देवी, फरीदाबाद के गांव फैज्जुपुर खादर से सरिता, पंचकुला के गांव बालदवाला से सुनीता देवी, सोनीपत के गांव पुरखास राठी से सोनिया, कुरूक्षेत्र के गांव धनोरा जाटान से मनदीप कौर, नूंह के गांव संगेल से मंचनल रानी, फतेहाबाद के गांव ढाणी डूल्ट से सरोज, झज्जर के देव नगर से मनीषा, अंबाला के गांव काठगढ़ छपरा से नेहा देवी, रेवाड़ी के मोहम्मदपुर से शीला देवी, रोहतक के गांव पहरावर से बबीता, सिरसा के गांव मिठड़ी से कुलदीप कौर शामिल रही।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
इस मौके पर पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा, उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा, पुलिस अधीक्षक नीतीश अग्रवाल, पशुधन विकास बोर्ड के चेयरमैन धर्मवीर मिर्जापुर सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
क्रमांक- 2026
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ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਵੱਲੋਂ ਕੁਰੂਕਸ਼ੇਤਰ ਦੇ ਮਥਾਣਾ ਵਿਖੇ ਜੈਵਿਕ ਖੇਤੀਬਾਡ਼ੀ ਅਤੇ ਆਧੁਨਿਕ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਸੰਸਥਾ ਸਥਾਪਤ ਕਰਨ ਦਾ ਐਲਾਨ
ਸੰਸਥਾ ਵਿੱਚ ਖੇਤੀਬਾਡ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਵਿੱਚ ਯੂਜੀ, ਪੀਜੀ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਪੀਐਚਡੀ ਤੱਕ ਦੇ ਕੋਰਸ ਹੋਣਗੇ।
ਕੈਥਲ-ਢੰਡ-ਪਿਪਲੀ-ਰਾਦੌਰ-ਯਮੁਨਾਨਗਰ ਸਡ਼ਕ ਨੂੰ ਚਾਰ ਮਾਰਗੀ ਬਣਾਇਆ ਜਾਵੇਗਾ
ਹੁਣ ਹਰ ਸਾਲ ਲਾਡਵਾ ਵਿੱਚ ਹੋਵੇਗਾ ਖੇਤੀਬਾਡ਼ੀ ਵਿਕਾਸ ਮੇਲਾ
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨਾਇਬ ਸਿੰਘ ਸੈਨੀ ਨੇ ਲਾਡਵਾ ਉਪ ਮੰਡਲ ਸਕੱਤਰੇਤ ਦੀ ਨਵੀਂ ਇਮਾਰਤ ਅਤੇ 9 ਨਵੀਆਂ ਸਡ਼ਕਾਂ ਦਾ ਨੀਂਹ ਪੱਥਰ ਰੱਖਿਆ
ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਮੇਲਾ ਗਿਆਨ, ਨਵੀਨਤਾ ਅਤੇ ਪ੍ਰੇਰਣਾ ਦਾ ਇੱਕ ਵਿਲੱਖਣ ਸੰਗਮ ਹੈਃ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ
ਚੰਡੀਗਡ਼੍ਹ/ਸੰਘੋਲ-ਟਾਈਮਜ਼/ਜਤਿੰਦਰ-ਪਾਲ-ਸਿੰਘ/28ਫਰਵਰੀ,2026 – ਹਰਿਆਣਾ ਦੇ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨਾਇਬ ਸਿੰਘ ਸੈਨੀ ਨੇ ਇਹ ਐਲਾਨ ਲਾਡਵਾ ਵਿੱਚ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਕਾਸ ਮੇਲੇ ਵਿੱਚ ਕੀਤਾ। ਪਿੰਡ ਮਥਾਣਾ ਵਿੱਚ 10 ਏਕਡ਼ ਜ਼ਮੀਨ ‘ਤੇ ਇੰਸਟੀਟਿਊਟ ਆਵ੍ ਆਰਗੈਨਿਕ ਐਗਰੀਕਲਚਰ ਐਂਡ ਮਾਡਰਨ ਮੈਨੇਜਮੈਂਟ ਸਿਸਟਮ ਖੋਲ੍ਹਿਆ ਜਾਵੇਗਾ। ਇਹ ਸੰਸਥਾ ਖੇਤੀਬਾਡ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਵਿੱਚ ਯੂਜੀ, ਪੀਜੀ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਪੀਐਚਡੀ ਤੱਕ ਦੇ ਕੋਰਸ ਪੇਸ਼ ਕਰੇਗੀ। ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਹੀ ਕੈਥਲ ਤੋਂ ਯਮੁਨਾਨਗਰ ਵਾਇਆ ਢੰਡ, ਪਿਪਲੀ, ਰਾਦੌਰ ਤੱਕ ਚਾਰ ਮਾਰਗੀ ਸਡ਼ਕ ਦਾ ਵੀ ਐਲਾਨ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ। ਇਹ ਚਾਰ ਮਾਰਗੀ ਰੂਟ ਐੱਨਐੱਚ-152ਡੀ, ਐੱਨਐੱਚ-44 ਅਤੇ ਸ਼ਾਮਲੀ ਐਕਸਪ੍ਰੈੱਸਵੇਅ ਨੂੰ ਜੋਡ਼ੇਗਾ। ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਲਾਡਵਾ ਸਬ-ਡਿਵੀਜ਼ਨ ਸਕੱਤਰੇਤ ਦੀ ਨਵੀਂ ਇਮਾਰਤ, ਲੋਕ ਨਿਰਮਾਣ ਵਿਭਾਗ ਦੀਆਂ 9 ਸਡ਼ਕਾਂ ਦਾ ਨੀਂਹ ਪੱਥਰ ਵੀ ਰੱਖਿਆ।
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨਾਇਬ ਸਿੰਘ ਸੈਨੀ ਨੇ ਅੱਜ ਲਾਡਵਾ ਅਨਾਜ ਮੰਡੀ ਵਿਖੇ ਚ. ਚਰਨ ਸਿੰਘ ਹਰਿਆਣਾ ਖੇਤੀਬਾਡ਼ੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵੱਲੋਂ ਕਰਵਾਏ ਗਏ ਸੂਬਾ ਪੱਧਰੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਕਾਸ ਮੇਲੇ ਦਾ ਉਦਘਾਟਨ ਕੀਤਾ। ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਇੱਕ ਟ੍ਰੈਕਟਰ ਉੱਤੇ ਬੈਠ ਕੇ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਅਤੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਵੱਲੋਂ ਲਗਾਏ ਗਏ ਸਟਾਲਾਂ ਅਤੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਮੇਲੇ ਦਾ ਦੌਰਾ ਕੀਤਾ।
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਕਾਸ ਮੇਲੇ ਨੂੰ ਹਰਿਆਣਾ ਦੀ ਖੇਤੀਬਾਡ਼ੀ ਭਾਵਨਾ ਦਾ ਉਤਸਵ ਦੱਸਿਆ ਜੋ ਕਿ ਅੰਨਦਾਤਾ ਦੀ ਸਖ਼ਤ ਮਿਹਨਤ, ਦ੍ਰਿਡ਼੍ਹ ਇਰਾਦੇ ਅਤੇ ਨਵੀਨਤਾ ਦਾ ਤਿਉਹਾਰ ਹੈ।
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਅਤੇ ਸਾਰੇ ਪ੍ਰਬੰਧਕਾਂ ਨੂੰ ਇਸ ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਸਮਾਗਮ ਲਈ ਵਧਾਈ ਦਿੱਤੀ। ਇਸ ਦੌਰਾਨ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨਵੀਨ ਪਟਨਾਇਕ ਨੇ ਰਾਜ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਮਹਾਸ਼ਿਵਰਾਤਰੀ ਦੀ ਵਧਾਈ ਦਿੱਤੀ। ਇਸ ਮੌਕੇ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਅਤੇ ਖੇਤੀਬਾਡ਼ੀ ਅਤੇ ਕਿਸਾਨ ਭਲਾਈ ਮੰਤਰੀ ਨੂੰ ਚੌਧਰੀ ਚਰਨ ਸਿੰਘ ਹਰਿਆਣਾ ਖੇਤੀਬਾਡ਼ੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੇ ਉਪ-ਕੁਲਪਤੀ ਡਾ. ਬੀ. ਆਰ. ਕੰਬੋਜ ਨੇ ਯਾਦਗਾਰੀ ਚਿੰਨ੍ਹ, ਸ਼ਾਲ ਅਤੇ ਫੁੱਲਾਂ ਦੇ ਗੁਲਦਸਤੇ ਦੇ ਕੇ ਸਨਮਾਨਿਤ ਕੀਤਾ।
ਆਪਣੇ ਸੰਬੋਧਨ ਵਿੱਚ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪ੍ਰਗਤੀਸ਼ੀਲ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੇ ਇਨੋਵੇਸ਼ਨਾਂ ਨਾਲ ਖੇਤੀਬਾਡ਼ੀ ਖੇਤਰ ਨੂੰ ਹੁਲਾਰਾ ਦਿੱਤਾ ਹੈ, ਜੋ ਸਾਡੇ ਹੋਰ ਕਿਸਾਨਾਂ ਲਈ ਪ੍ਰੇਰਣਾ ਦਾ ਸਰੋਤ ਬਣ ਗਏ ਹਨ। ਮੇਲੇ ਦਾ ਵਿਸ਼ਾ ਹੈ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸੰਭਾਲ, ਪ੍ਰਤੀ ਬੂੰਦ ਇੱਕ ਤੋਂ ਵੱਧ ਫਸਲ। ਬਦਲਦੇ ਮੌਸਮ, ਧਰਤੀ ਹੇਠਲੇ ਪਾਣੀ ਦੇ ਘਟਦੇ ਪੱਧਰ ਅਤੇ ਅਸਥਿਰ ਵਰਖਾ ਨੇ ਖੇਤੀਬਾਡ਼ੀ ਖੇਤਰ ਲਈ ਨਵੀਆਂ ਚੁਣੌਤੀਆਂ ਪੈਦਾ ਕਰ ਦਿੱਤੀਆਂ ਹਨ। ਅਜਿਹੇ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ, ਜਲ ਸੰਭਾਲ਼ ‘ਤੇ ਕੇਂਦ੍ਰਿਤ ਇਹ ਮੇਲਾ ਸੱਚਮੁੱਚ ਇੱਕ ਦੂਰਦਰਸ਼ੀ ਪਹਿਲ ਹੈ। ਪ੍ਰਤੀ ਬੂੰਦ ਵਧੇਰੇ ਫਸਲ ਦਾ ਮਤਲਬ ਟੈਕਨੋਲੋਜੀ ਨਾਲ ਸਾਡੀ ਸੋਚ ਵਿੱਚ ਤਬਦੀਲੀ ਵੀ ਹੈ। ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਕਿਹਾ, “ਸਾਨੂੰ ਇਹ ਸਮਝਣਾ ਹੋਵੇਗਾ ਕਿ ਪਾਣੀ ਅਨੰਤ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਇਹ ਮੇਲਾ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਜਲ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਦੀਆਂ ਉੱਨਤ ਤਕਨੀਕਾਂ ਨਾਲ ਜੋਡ਼ ਕੇ ਇੱਕ ਜਨ ਅੰਦੋਲਨ ਦਾ ਰੂਪ ਲਵੇਗਾ।
ਵਿਗਿਆਨਕ ਖੋਜ ਨੂੰ ਹਰ ਖੇਤ ਅਤੇ ਹਰ ਕਿਸਾਨ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚਾਓ।
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨਾਇਬ ਸਿੰਘ ਸੈਨੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੀ ਵਿਗਿਆਨਕ ਖੋਜ ਪ੍ਰਯੋਗਸ਼ਾਲਾ ਤੱਕ ਸੀਮਤ ਨਹੀਂ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ, ਬਲਕਿ ਹਰ ਖੇਤ ਅਤੇ ਹਰ ਕਿਸਾਨ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ਕਿਸਾਨਾਂ ਅਤੇ ਵਿਗਿਆਨੀਆਂ ਦਰਮਿਆਨ ਸਿੱਧੀ ਗੱਲਬਾਤ ਹੀ ਖੇਤੀਬਾਡ਼ੀ ਨੂੰ ਨਵੀਆਂ ਉਚਾਈਆਂ ‘ਤੇ ਲੈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ। ਇਹ ਮੇਲਾ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਆਧੁਨਿਕ ਖੇਤੀਬਾਡ਼ੀ ਮਸ਼ੀਨਾਂ, ਉੱਨਤ ਬੀਜਾਂ, ਨਵੀਆਂ ਟੈਕਨੋਲੋਜੀਆਂ ਅਤੇ ਵਿਗਿਆਨਕ ਸਲਾਹ ਨਾਲ ਜੋਡ਼ਨ ਲਈ ਇੱਕ ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ ਮੰਚ ਹੈ। 150 ਤੋਂ ਵੱਧ ਸਟਾਲ, ਆਧੁਨਿਕ ਖੇਤੀਬਾਡ਼ੀ ਮਸ਼ੀਨਰੀ ਦਾ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ, ਮਿੱਟੀ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਜਾਂਚ ਦੀ ਸਹੂਲਤ, ਰੋਗਗ੍ਰਸਤ ਫਸਲਾਂ ਦੀ ਜਾਂਚ, ਫਸਲਾਂ ਦਾ ਮੁਕਾਬਲਾ, ਲੱਕੀ ਡਰਾਅ, ਇਹ ਸਾਰੇ ਮੇਲੇ ਨੂੰ ਗਿਆਨ, ਨਵੀਨਤਾ ਅਤੇ ਪ੍ਰੇਰਣਾ ਦਾ ਸੰਗਮ ਬਣਾ ਰਹੇ ਹਨ।
ਸਰਕਾਰ ਦਾ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀਕੋਣ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਭੋਜਨ ਪ੍ਰਦਾਤਾ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਊਰਜਾ ਪ੍ਰਦਾਤਾ, ਰੋਜ਼ਗਾਰ ਪ੍ਰਦਾਤਾ ਅਤੇ ਅਰਥਵਿਵਸਥਾ ਦਾ ਨਿਰਮਾਤਾ ਬਣਾਉਣਾ ਹੈ।
ਹਰਿਆਣਾ ਦੇ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨਾਇਬ ਸਿੰਘ ਸੈਨੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਹਰਿਆਣਾ ਖੇਤੀਬਾਡ਼ੀ ਅਧਾਰਤ ਰਾਜ ਹੈ। ਸਾਡੀ ਪਹਿਚਾਣ ਸਾਡੇ ਖੇਤਾਂ ਨਾਲ ਹੈ, ਸਾਡੀ ਖੁਸ਼ਹਾਲੀ ਸਾਡੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਦੇ ਪਸੀਨੇ ਨਾਲ ਹੈ। ਹਰਿਆਣਾ ਦੀ ਧਰਤੀ ਨੇ ਹਮੇਸ਼ਾ ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਭੋਜਨ ਵਿੱਚ ਆਤਮਨਿਰਭਰ ਬਣਾਉਣ ਵਿੱਚ ਮੋਹਰੀ ਭੂਮਿਕਾ ਨਿਭਾਈ ਹੈ। ਸਾਡੀ ਡਬਲ ਇੰਜਣ ਸਰਕਾਰ ਦਾ ਸਪੱਸ਼ਟ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀਕੋਣ ਹੈ ਕਿ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਨਾ ਸਿਰਫ ਅੰਨਦਾਤਾ (ਖੁਰਾਕ ਪ੍ਰਦਾਤਾ) ਬਣਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਬਲਕਿ ਊਰਜਾ ਦੇਣ ਵਾਲੇ, ਨੌਕਰੀ ਦੇਣ ਵਾਲੇ ਅਤੇ ਅਰਥਵਿਵਸਥਾ ਦੇ ਨਿਰਮਾਤਾ ਵੀ ਬਣਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਲਈ ਸਾਡੀਆਂ ਪਾਲਿਸੀਆਂ ਸਿਰਫ਼ ਉਤਪਾਦਨ ਵਧਾਉਣ ਤੱਕ ਸੀਮਤ ਨਹੀਂ ਹਨ, ਬਲਕਿ ਕਿਸਾਨਾਂ ਦੀ ਆਮਦਨ ਵਧਾਉਣ, ਲਾਗਤ ਘਟਾਉਣ ਅਤੇ ਜੋਖਮਾਂ ਨੂੰ ਘੱਟ ਕਰਨ ‘ਤੇ ਕੇਂਦ੍ਰਿਤ ਹਨ।
ਝੋਨੇ ਦੀ ਥਾਂ ਬਦਲਵੀਆਂ ਫਸਲਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ 157 ਕਰੋਡ਼ ਰੁਪਏ ਦੀ ਵਿੱਤੀ ਸਹਾਇਤਾ
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨਾਇਬ ਸਿੰਘ ਸੈਨੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸਾਡੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਅਜਿਹੀਆਂ ਫਸਲਾਂ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਘੱਟ ਪਾਣੀ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੈ। ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਅਜਿਹੀਆਂ ਫਸਲਾਂ ਨੂੰ ਉਤਸ਼ਾਹਿਤ ਕਰਨ ਲਈ 2020 ਵਿੱਚ ਮੇਰਾ ਪਾਣੀ-ਮੇਰੀ ਵਿਰਾਸਤ ਯੋਜਨਾ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕੀਤੀ ਸੀ। ਇਸ ਯੋਜਨਾ ਦੇ ਤਹਿਤ ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ 8 ਹਜ਼ਾਰ ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕਡ਼ ਦੀ ਵਿੱਤੀ ਸਹਾਇਤਾ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜੋ ਬਦਲਵੀਂ ਫਸਲ ਲੈਂਦੇ ਹਨ ਜਾਂ ਖੇਤ ਖਾਲੀ ਛੱਡ ਦਿੰਦੇ ਹਨ। ਇਸ ਯੋਜਨਾ ਦੇ ਤਹਿਤ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ 2 ਲੱਖ 20 ਹਜ਼ਾਰ ਏਕਡ਼ ਵਿੱਚ ਝੋਨੇ ਦੀ ਥਾਂ ਵਿਕਲਪਿਕ ਫਸਲਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ 157 ਕਰੋਡ਼ ਰੁਪਏ ਦੀ ਵਿੱਤੀ ਸਹਾਇਤਾ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਹੈ। ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ, ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਮਾਈਕਰੋ-ਸਿੰਚਾਈ ਤਕਨੀਕਾਂ ਜਿਵੇਂ ਮੀਂਹ ਦੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸੰਭਾਲ, ਤੁਪਕਾ ਅਤੇ ਛਿਡ਼ਕਾਅ ਨੂੰ ਉਤਸ਼ਾਹਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਸੂਖਮ ਸਿੰਚਾਈ ਤਕਨੀਕਾਂ ‘ਤੇ 85 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਤੱਕ ਸਬਸਿਡੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ। ਛੱਪਡ਼ਾਂ ਦੀ ਉਸਾਰੀ ਲਈ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ 85 ਫੀਸਦੀ ਤੱਕ ਸਬਸਿਡੀ ਵੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।
ਸਿੰਚਾਈ ਲਈ ਸੀਵਰੇਜ ਟਰੀਟਮੈਂਟ ਪਲਾਂਟਾਂ ਦੇ ਸੋਧੇ ਹੋਏ ਪਾਣੀ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਲਈ 11 ਯੋਜਨਾਵਾਂ ਮੁਕੰਮਲ
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨਾਇਬ ਸਿੰਘ ਸੈਨੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਸੀਵਰੇਜ ਟਰੀਟਮੈਂਟ ਪਲਾਂਟਾਂ ਦੇ ਸੋਧੇ ਹੋਏ ਪਾਣੀ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਸਿੰਚਾਈ ਲਈ ਕਰਨ ਲਈ 27 ਯੋਜਨਾਵਾਂ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀਆਂ ਹਨ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚੋਂ 11 ਮੁਕੰਮਲ ਹੋ ਚੁੱਕੇ ਹਨ। ਇਹ ਸਿੰਚਾਈ ਲਈ ਇੱਕ ਸਥਾਈ ਜਲ ਸਰੋਤ ਮੁਹੱਈਆ ਕਰਵਾਉਣਗੇ, ਨਹਿਰਾਂ ਉੱਤੇ ਦਬਾਅ ਘਟਾਉਣਗੇ ਅਤੇ ਧਰਤੀ ਹੇਠਲੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਨੂੰ ਵੀ ਘਟਾਉਣਗੇ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਫਸਲਾਂ ਦੀ ਰਹਿੰਦ-ਖੂੰਹਦ ਅਤੇ ਪਰਾਲੀ ਸਾਡ਼ਨ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਨਾਲ ਨਜਿੱਠਣ ਲਈ ਸੰਵੇਦਨਸ਼ੀਲ ਬਣਾਇਆ ਹੈ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਪਰਾਲੀ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਲਈ 1 ਲੱਖ ਤੋਂ ਵੱਧ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਦਿੱਤੀਆਂ ਹਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸਰਕਾਰ ਕਿਸਾਨਾਂ ਵਿਰੁੱਧ ਹੈ।
ਸਰਕਾਰ ਕਿਸਾਨਾਂ ਤੱਕ ਡਰੋਨ, ਰਿਮੋਟ ਸੈਂਸਿੰਗ, ਏਆਈ ਅਧਾਰਤ ਫੈਸਲਾ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਅਤੇ ਡਿਜੀਟਲ ਖੇਤੀ ਪਹੁੰਚਾ ਰਹੀ ਹੈ।
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨਾਇਬ ਸਿੰਘ ਸੈਨੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਡਿਜੀਟਲ ਟੈਕਨੋਲੋਜੀ ਨੇ ਖੇਤੀਬਾਡ਼ੀ ਨੂੰ ਬਦਲ ਦਿੱਤਾ ਹੈ। ਅਜਿਹੀ ਸਥਿਤੀ ਵਿੱਚ, ਸਰਕਾਰ ਡਰੋਨ, ਰਿਮੋਟ ਸੈਂਸਿੰਗ, ਏਆਈ ਅਧਾਰਤ ਫੈਸਲਾ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਅਤੇ ਡਿਜੀਟਲ ਖੇਤੀ ਵਰਗੇ ਇਨੋਵੇਸ਼ਨਾਂ ਨੂੰ ਕਿਸਾਨ ਭਰਾਵਾਂ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚਾਉਣ ਲਈ ਕੰਮ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ। ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਖਰੀਦ ਪ੍ਰਣਾਲੀ, ਸਮੇਂ ਸਿਰ ਭੁਗਤਾਨ ਅਤੇ ਡਿਜੀਟਲ ਪਲੇਟਫਾਰਮ ਰਾਹੀਂ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਸਸ਼ਕਤ ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਕੰਮ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਇਹ ਖੇਤੀਬਾਡ਼ੀ ਵਿਕਾਸ ਮੇਲਾ ਇਸ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਮਜ਼ਬੂਤ ਕਦਮ ਹੈ। ਤੁਸੀਂ ਇੱਥੋਂ ਜੋ ਗਿਆਨ, ਪ੍ਰੇਰਣਾ ਅਤੇ ਊਰਜਾ ਲੈ ਕੇ ਜਾਓਗੇ, ਉਹ ਤੁਹਾਡੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਨਵੀਂ ਕਹਾਣੀ ਲਿਖੇਗਾ।
ਹਰਿਆਣਾ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਚਾਵਲ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਉਤਪਾਦਕ ਹੈ। ਸ਼ਿਆਮ ਸਿੰਘ ਰਾਣਾ
ਖੇਤੀਬਾਡ਼ੀ ਅਤੇ ਕਿਸਾਨ ਭਲਾਈ ਮੰਤਰੀ ਸ਼ਿਆਮ ਸਿੰਘ ਰਾਣਾ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਹਰਿਆਣਾ ਪੂਰੀ ਦੁਨੀਆ ਲਈ ਝੋਨੇ ਦੀ ਫਸਲ ਪੈਦਾ ਕਰਦਾ ਹੈ। ਸਾਡਾ ਦੇਸ਼ ਦੂਜੇ ਦੇਸ਼ਾਂ ਤੋਂ ਦਾਲਾਂ ਦੀ ਦਰਾਮਦ ਕਰਦਾ ਹੈ। ਹੁਣ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਆਮ ਫਸਲਾਂ ਨੂੰ ਛੱਡ ਕੇ ਹੋਰ ਫਸਲਾਂ ਦਾ ਉਤਪਾਦਨ ਕਰਨਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਹੀ, ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਪਾਣੀ ਦੀ ਲਾਗਤ ਵਾਲੀ ਚਾਵਲ ਦੀ ਫਸਲ ਦੀ ਕਟਾਈ ਟੈਕਨੋਲੋਜੀ ਅਤੇ ਸਿੱਧੀ ਬਿਜਾਈ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਜਾਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਖੁਸ਼ਹਾਲ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਪਸ਼ੂ ਪਾਲਣ, ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ, ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਦੇ ਉਤਪਾਦਨ ਵਰਗੇ ਵਿਕਲਪ ਸ਼ਾਮਲ ਕੀਤੇ ਹਨ। ਸਰਕਾਰ ਪਸ਼ੂ ਪਾਲਣ ਨੂੰ ਉਤਸ਼ਾਹਿਤ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ।
ਸਰਕਾਰ ਕਿਸਾਨਾਂ ਦੀ ਆਮਦਨ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਲਗਾਤਾਰ ਯਤਨ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ। ਇਹ ਯੋਜਨਾਵਾਂ 2047 ਤੱਕ ਇੱਕ ਵਿਕਸਿਤ ਭਾਰਤ ਦੇ ਟੀਚੇ ਨੂੰ ਧਿਆਨ ਵਿੱਚ ਰੱਖ ਕੇ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀਆਂ ਗਈਆਂ ਹਨ। “ਸਾਡੇ ਬਜ਼ੁਰਗ ਆਪਣੇ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਸਾਰੀਆਂ ਫਸਲਾਂ ਦੀ ਕਟਾਈ ਕਰਦੇ ਸਨ। ਉਸੇ ਢੰਗ ਨੂੰ ਅਪਣਾਉਣ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੈ।
ਐੱਚ. ਏ. ਯੂ. ਨੇ ਲਗਭਗ 50 ਕਿਸਮਾਂ ‘ਤੇ ਸਫਲ ਖੋਜ ਕੀਤੀ
ਖੇਤੀਬਾਡ਼ੀ ਵਿਭਾਗ ਦੇ ਪ੍ਰਮੁੱਖ ਸਕੱਤਰ ਪੰਕਜ ਅਗਰਵਾਲ ਨੇ ਇਕੱਠ ਦਾ ਸਵਾਗਤ ਕੀਤਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਵਿਭਾਗ ਦੀਆਂ ਯੋਜਨਾਵਾਂ ਬਾਰੇ ਵੀ ਵਿਸਥਾਰ ਨਾਲ ਦੱਸਿਆ।
ਚੌਧਰੀ ਚਰਨ ਸਿੰਘ ਹਰਿਆਣਾ ਖੇਤੀਬਾਡ਼ੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ, ਹਿਸਾਰ ਦੇ ਉਪ-ਕੁਲਪਤੀ ਪ੍ਰੋ. ਡਾ. ਬੀ. ਆਰ. ਕੰਬੋਜ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਐੱਚ. ਏ. ਯੂ. ਨੇ ਪਹਿਲੀ ਵਾਰ ਆਪਣੇ ਕੈਂਪਸ ਦੇ ਬਾਹਰ ਮੇਲੇ ਦਾ ਆਯੋਜਨ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਸੰਸਥਾ ਦੀ ਤਰਫੋਂ ਬਾਜਰਾ, ਗੰਨਾ, ਝੋਨੇ ਸਮੇਤ ਲਗਭਗ 50 ਕਿਸਮਾਂ ‘ਤੇ ਸਫਲ ਖੋਜ ਕੀਤੀ ਹੈ। ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਸਿੱਧੇ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਬੀਜ ਬੀਜਣ ਲਈ ਉਤਸ਼ਾਹਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ।
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਮਹਿਲਾ ਪ੍ਰਗਤੀਸ਼ੀਲ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਸਨਮਾਨਿਤ ਕੀਤਾ।
ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨਾਇਬ ਸਿੰਘ ਸੈਣੀ ਨੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਵਿਕਾਸ ਮੇਲੇ ਵਿੱਚ ਸੂਬੇ ਦੀਆਂ ਪ੍ਰਗਤੀਸ਼ੀਲ ਮਹਿਲਾ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਸਨਮਾਨਿਤ ਕੀਤਾ। ਇਨ੍ਹਾਂ ‘ਚ ਕਰਨਾਲ ਦੇ ਪਿੰਡ ਔਗੰਧ ਦੀ ਕਾਜਲ, ਮੰਡਕੋਲਾ ਦੇ ਪਿੰਡ ਮੀਰਪੁਰ ਕੌਰਾਲੀ ਦੀ ਇੰਦਰਾ ਦੇਵੀ, ਹਿਸਾਰ ਦੇ ਆਦਮਪੁਰ ਦੀ ਰੇਖਾ, ਭਿਵਾਨੀ ਦੇ ਪਿੰਡ ਨੱਥੂਵਾਸ ਦੀ ਮੁੰਨੀ ਬਾਈ, ਯਮੁਨਾਨਗਰ ਦੇ ਪਿੰਡ ਬਹਾਦੁਰਪੁਰ ਦੀ ਰਜਨੀ, ਪਾਣੀਪਤ ਦੇ ਪਿੰਡ ਬਸਦਾ ਦੀ ਪੁਸ਼ਪਾ ਦੇਵੀ, ਪਾਣੀਪਤ ਦੇ ਪਿੰਡ ਬਸਦਾ ਦੀ ਨੀਤੂ ਯਾਦਵ, ਪਿੰਡ ਗੁਧਾਮਾਸ ਤੋਂ ਨੀਤੂ ਯਾਦਵ, ਪੋਹੜਮਾਸ ਪਿੰਡ ਦੀ ਮਹਿਲਾ ਸ਼ਾਮਲ ਹਨ। ਕੈਥਲ ਦੇ ਪਿੰਡ ਬੱਟਾ ਦੀ ਦੇਵੀ, ਫਰੀਦਾਬਾਦ ਦੇ ਪਿੰਡ ਫੈਜੂਪੁਰ ਖੱਦਰ ਦੀ ਸਰਿਤਾ, ਪੰਚਕੂਲਾ ਦੇ ਪਿੰਡ ਬਾਲਦਵਾਲਾ ਦੀ ਸੁਨੀਤਾ ਦੇਵੀ, ਸੋਨੀਪਤ ਦੇ ਪਿੰਡ ਪੁਰਖਾਸ ਰਾਠੀ ਦੀ ਸੋਨੀਆ, ਕੁਰੂਕਸ਼ੇਤਰ ਦੇ ਪਿੰਡ ਧਨੌਰਾ ਜਾਟਾਨ ਦੀ ਮਨਦੀਪ ਕੌਰ, ਨੂਹ ਦੇ ਪਿੰਡ ਸੰਗੇਲ ਦੀ ਮਨਚਨਾਲ ਰਾਣੀ, ਨੂਹ ਦੇ ਪਿੰਡ ਸੰਗੇਲ ਦੀ ਸਰੋਜ, ਜੇਠਾ ਦੇਵਗੜ੍ਹ ਤੋਂ ਸਰੋਜ, ਦੇਵਗੜ੍ਹ ਦੇ ਪਿੰਡ ਮਾਨਸਾ ਤੋਂ। ਅੰਬਾਲਾ ਦੇ ਪਿੰਡ ਕਾਠਗੜ੍ਹ ਛਪਰਾ ਦੀ ਨੇਹਾ ਦੇਵੀ, ਰੇਵਾੜੀ ਦੇ ਪਿੰਡ ਮੁਹੰਮਦਪੁਰ ਦੀ ਸ਼ੀਲਾ ਦੇਵੀ, ਰੋਹਤਕ ਦੇ ਪਿੰਡ ਪਹਾੜਾਵਰ ਦੀ ਬਬੀਤਾ, ਸਿਰਸਾ ਦੇ ਪਿੰਡ ਮਿਠੜੀ ਦੀ ਕੁਲਦੀਪ ਕੌਰ। ਇਸ ਸਮਾਗਮ ਵਿੱਚ ਸਾਬਕਾ ਰਾਜ ਮੰਤਰੀ ਸੁਭਾਸ਼ ਸੁਧਾ, ਡਿਪਟੀ ਕਮਿਸ਼ਨਰ ਵਿਸ਼ਰਾਮ ਕੁਮਾਰ ਮੀਣਾ, ਪੁਲਿਸ ਸੁਪਰਡੈਂਟ ਨਿਤੀਸ਼ ਅਗਰਵਾਲ, ਪਸ਼ੂਧਨ ਵਿਕਾਸ ਬੋਰਡ ਦੇ ਚੇਅਰਮੈਨ ਧਰਮਵੀਰ ਮਿਰਜ਼ਾਪੁਰ ਅਤੇ ਵੱਡੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਕਿਸਾਨ ਮੌਜੂਦ ਸਨ।
