संयुक्त किसान मोर्चा ने नर्मदा बचाओ आंदोलन के अनशन का समर्थन किया
245 गांवों को डुबोकर 39 वर्षों में विस्थापित किसानों का संपूर्ण पुनर्वास नहीं किया जाना शर्मनाक: संयुक्त किसान मोर्चा
संयुक्त किसान मोर्चे ने अनिश्चितकालीन अनशन के पांचवें दिन मेधा पाटकर के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जाहिर की
जल शक्ति मंत्री से मांग है कि वह 2019 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात के मुख्यमंत्रीयों की तत्काल बैठक बुलाकर संपूर्ण पुनर्वास सुनिश्चित करें: संयुक्त किसान मोर्चा
केंद्र और मध्यप्रदेश सरकार तत्काल वार्ता करें: एसकेएम

नई दिल्ली/संघोल टाइम्स/ब्यूरो/20 जून,2024 संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने नर्मदा घाटी के बड़वानी जिले के चिखलदा ग्राम में नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर द्वारा किए जा रहे अनिश्चितकालीन अनशन के छठे दिन प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि यह शर्मनाक है कि केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश सरकार गत 39 वर्षों में 245 गांव को डुबाने के बाद किसान, मजदूर, मछुआरे, कुम्हार, केवट, दुकानदार आदि के पुनर्वास करने में असफल रही है। जिसके चलते नर्मदा बचाओ आंदोलन को अनिश्चितकालीन अनशन करने को मजबूर होना पड़ा है।
संयुक्त किसान मोर्चा ने छे दिन से अनिश्चितकालीन अनशन कर रही मेधा पाटकर के स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त की है।
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि सरदार सरोवर बांध के मध्यप्रदेश के हजारों तथा महाराष्ट्र, गुजरात के सैकड़ों विस्थापितों का सम्पूर्ण पुनर्वास पूरा करने, नर्मदा ट्रिब्यूनल का फैसला, नर्मदा पुनर्वास नीति तथा सर्वोच्च अदालत एवं उच्च न्यायालय के सभी आदेशों का पूर्ण पालन करते हुए किसान, मजदूर, मछुआरे, कुम्हार, केवट, दुकानदार आदि का संपूर्ण पुनर्वास करने, टिन शेड में 6 साल से नारकीय जीवन काट रहे विस्थापितों का पुनर्वास करने, 2023 में अवैध तरीके से आई डूब से ग्रस्त, 15946 डूब से बाहर किए गए परिवारों में से सभी परिवारों को, जो डूब चुके है, उन्हें घर, खेत, फसलों के नुकसान की पूरी भरपाई करने एवं उनका सम्पूर्ण पुनर्वास करने, पुनर्वास के सभी कार्य पूरा होने तक कानून और न्यायालयों के आदेशों के अनुसार सरदार सरोवर बांध का जलस्तर 122 मीटर तक रखने एवं सरदार सरोवर के गेट खुले रखने आदि मांगों को लेकर किए जा रहे अनशन का हम समर्थन करते है।
संयुक्त किसान मोर्चा ने जल शक्ति मंत्री से मांग की है कि वह 2019 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात के मुख्यमंत्रीयों की तत्काल बैठक बुलाकर संपूर्ण पुनर्वास सुनिश्चित करें।
संयुक्त किसान मोर्चा ने नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण से मांग की है कि वह सर्वोच्च न्यायालय के 2019 के निर्देशों का पालन करना सुनिश्चित करें।
