10 से 18 जनवरी तक चलने वाले विश्व पुस्तक मेले में युवा लेखक विकास बिश्नोई की पुस्तक ‘अनकहे लम्हे’ का हुआ विमोचन
नई-दिल्ली/चंडीगढ़/SANGHOL-TIMES/KEWAL-BHARTI/11JANUARY,2026-
प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में शनिवार से शुरू हुए 53वें विश्व पुस्तक मेले के लेखक मंच पर आयोजित पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में युवा लेखक एवं कहानीकार विकास बिश्नोई की पुस्तक ‘अनकहे लम्हे’ का विमोचन किया गया। यह पुस्तक प्रयागराज स्थित इंक पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित की गई है।
विमोचन कार्यक्रम में इंक पब्लिकेशन के प्रतिनिधि दिनेश कुशवाहा ने पुस्तक पर चर्चा करते हुए कहा कि विकास बिश्नोई एक संवेदनशील और उभरते हुए युवा लेखक हैं। कम उम्र में ही उन्होंने मानवीय रिश्तों, भावनाओं और आंतरिक द्वंद्व को जिस गहराई से समझा है, वही उनकी कहानियों की सबसे बड़ी ताकत है। उनकी रचनाएँ केवल पढ़ी नहीं जातीं, बल्कि पाठक उन्हें महसूस भी करता है।
कार्यक्रम का संचालन कर रहीं लेखिका सविता सिंह ‘सैवी’ ने कहा कि ‘अनकहे लम्हे’ उन भावनात्मक पलों की कथा है, जहाँ रिश्तों की मिठास भी है और अनकही पीड़ा भी। यह पुस्तक पाठकों को भावनाओं की उस यात्रा पर ले जाती है, जिसमें हर पाठक अपने जीवन के कुछ अनुभवों से स्वयं को जुड़ा हुआ पाता है।
लेखक बिश्नोई ने इस अवसर पर पाठकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पुस्तक उन भावनाओं की अभिव्यक्ति है, जिन्हें हम अक्सर शब्दों में नहीं ढाल पाते। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ‘अनकहे लम्हे’ पाठकों के दिलों तक अपनी जगह बनाएगी। दर्शक दीर्घा में उपस्थित लोगों ने कहानी संग्रह की खूब सराहना की।
इसके साथ डॉ हरिवंश राय बच्चन पुरस्कार से सम्मानित कवयित्री मोनिका शर्मा की पुस्तक याद तुम्हारी, सोनू चौहान की दो कहानी संग्रह शायर का घर और वतन की मिट्टी, सरस आजाद की पुस्तक मनु-फिरदौस, अलंकृता राय के काव्य संग्रह गीली मिट्टी, सुरभि जैन की पुस्तक रूपांतरा, जयंती सेन मीना की सरकती परछाइयाँ पुस्तक का भी विमोचन लेखक मंच पर इंक पब्लिकेशन द्वारा आयोजित पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में किया गया।
पुस्तक मेले में 35 से अधिक देशों के 1000 प्रकाशक ले रहे हैं भाग
उल्लेखनीय है कि 53वां विश्व पुस्तक मेला 10 से 18 जनवरी तक आयोजित किया जा रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में रूस, स्पेन, जापान, पोलैंड, फ्रांस, अबू धाबी, ईरान, कजाकिस्तान, हंगरी और चिली सहित 35 से अधिक देशों के लगभग 1000 प्रकाशक भाग ले रहे हैं। मेले में 3000 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं तथा 600 से ज्यादा साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
ये हैं विकास बिश्नोई
विकास बिश्नोई श्रीमती ईमानती देवी और कवि पृथ्वी सिंह बैनीवाल के सुपुत्र हैं। गुरू जम्भेश्वर विश्वविद्यालय हिसार से शिक्षा ग्रहण करने के उपरांत वर्तमान में तकनीकी क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों से पंचकूला में बिज़नेस एनालिस्ट के पद पर कार्य कर रहे हैं। तकनीकी क्षेत्र में होने के बावजूद शुरू से ही इनका साहित्य जगत से विशेष प्रेम रहा। छोटी सी उम्र से ही इनकी रुचि लेखन व सामाजिक कार्यों में रही है। इनके अब तक दो कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। साथ ही देशभर के विभिन्न समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में आलेख, संस्मरण एवं कहानियां लिख रहे हैं।
इसके अतिरिक्त विकास बिश्नोई ने योग में कई वर्षों तक उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में अनेकों पदक भी जीते हैं। शिक्षा, खेलकूद, लेखन व सामाजिक कार्य के चलते इन्हें अनेकों मंचों पर सम्मानित भी किया जा चुका है।
– Vikas Bishnoi
Panchkula – Chandigarh
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