सांसद विक्रम साहनी ने संसद में सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वाले बयानों पर चिंता व्यक्त की
चंडीगढ़/दिल्ली/संघोल-टाइम्स/नागपाल/06अगस्त,2024- पंजाब से राज्यसभा सांसद डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी ने जाति, पंथ और धर्म के आधार पर नफरत फैलाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग पर एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए एक सशक्त भाषण दिया ।
डॉ. साहनी ने सोशल मीडिया पर हानिकारक सामग्री के अनियंत्रित प्रसार पर गहरी चिंता व्यक्त की, उन्होंने असामाजिक तत्वों द्वारा इन प्लेटफार्मों का उपयोग अपमानजनक टिप्पणियों और द्वेष फैलाने के लिए करने पर प्रकाश डाला।
डॉ. साहनी ने कहा, “लोग बिना किसी जवाबदेही के विभिन्न समुदायों के लिए अपमानजनक टिप्पणियां, नफरत फैलाने वाले बयान, उकसावे की बातें कर रहे हैं।” डॉ. साहनी ने परेशान करने वाले उदाहरणों की ओर ध्यान आकर्षित किया, जहां छोटी-छोटी घटनाओं, जैसे कि किसी खिलाड़ी द्वारा कैच छूट जाने पर किसी विशिष्ट धार्मिक समूह का अपमान करने वाली आपत्तिजनक टिप्पणियां होना। उल्लेखनीय रूप से, डॉ. साहनी ने हाल के उदाहरणों का हवाला दिया, जिसमें सोशल मीडिया पर कुछ अराजक तत्वों द्वारा भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी को निशाना बनाकर नफरत फैलाने वाले बयान दिए गए ।
डॉ. साहनी ने सदन के पटल पर एक डोजियर पेश किया है, जिसमें गैर-जिम्मेदाराना तरीके से नफरत फैलाने में लगे विभिन्न सोशल मीडिया खातों का ब्यौरा दिया गया है और तत्काल कार्रवाई करने का आह्वान किया है।
डॉ. साहनी ने मौजूदा कानूनी ढांचे में एक कमी को भी उजागर किया, उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000, 24 साल पहले बनाया गया था, जब सोशल मीडिया अस्तित्व में नहीं था, इसलिए यह नफरत फैलाने वाले बयान के कई रूपों को पर्याप्त रूप से संबोधित करने में विफल रहा है।
डॉ. साहनी ने कहा कि इस समस्या को हल करने के लिए उन्होंने एक निजी सदस्य विधेयक पेश किया है, जिसमें नफरत फैलाने वाले भाषण को और अधिक स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है और अपराधियों के लिए कठोर दंड का प्रस्ताव दिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नफरत फैलाने वाले भाषण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए इस विधेयक पर जल्द ही संसद में चर्चा की जाएगी।
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